दूरदराज के इलाकों से पढ़ने आने वाले छात्रों को मिलेगा सुरक्षित आवास और बेहतर पढ़ाई का माहौल
रायपुर, जशपुर जिले में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए छात्रावास सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। जिले में 24 पोस्ट मैट्रिक और प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति छात्रावास भवनों के निर्माण के लिए 77 करोड़ 86 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। नए भवन बनने से दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों से पढ़ाई के लिए आने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित आवास के साथ पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सकेगा।
इन छात्रावासों में बालक और कन्या दोनों के लिए पोस्ट मैट्रिक और प्री-मैट्रिक भवन शामिल हैं। अलग-अलग विकासखंडों में बनने वाले इन भवनों से विद्यार्थियों को रहने, पढ़ने और दैनिक जरूरतों से जुड़ी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकेंगी।
इन इलाकों में बनेंगे छात्रावास
जशपुर में पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास के लिए 1.92 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। लोदाम और पैकू में प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1.53-1.53 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। मनोरा और बगीचा में पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1.92-1.92 करोड़ रुपये तथा रौनी में प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1.53 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
पतराटोली में पोस्ट मैट्रिक कन्या और दुलदुला में पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1.92-1.92 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। दुलदुला और कुनकुरी क्रमांक-2 में प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1.53-1.53 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
पंडरीपानी और तपकरा में पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1.92-1.92 करोड़ रुपये, जबकि लवाकेरा, पंडरीपानी और दोकड़ा में प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1.53-1.53 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। दोकड़ा में पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1.92 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
कांसाबेल में पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 2.89 करोड़ और प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए 1.53 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। बटईकेला में प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास, कोतबा में पोस्ट मैट्रिक और प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास तथा बागबहार और गाला में प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के लिए भी 1.53 करोड़ रुपये प्रत्येक स्वीकृत किए गए हैं।
दूरदराज के छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा
जशपुर के दूरस्थ गांवों से विद्यार्थी माध्यमिक और उच्च शिक्षा के लिए अलग-अलग कस्बों और शहरों में आते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए नए छात्रावास बनने से रहने की समस्या कम होगी और उन्हें शिक्षण संस्थानों के आसपास सुरक्षित आवास मिल सकेगा।
सरकार की ओर से शिक्षा अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ आदिवासी विद्यार्थियों के लिए आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। नए छात्रावासों से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण मिलने के साथ शिक्षा तक उनकी पहुंच भी आसान होने की उम्मीद है।