रायपुर, लंबे समय तक नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों का दंश झेलने वाला बस्तर अब विकास और नई उम्मीदों की ओर बढ़ रहा है। इसी बदलाव के बीच जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन सहायता एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर शुरू हुआ है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित इस शिविर में बस्तर संभाग के बस्तर, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों के 3,800 से ज्यादा जरूरतमंदों का पंजीयन किया गया है।
शिविर में नक्सली विस्फोट, सड़क हादसों और अन्य कारणों से अंग गंवा चुके लोगों को कृत्रिम हाथ-पैर समेत जरूरी सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। खास बात यह है कि आधुनिक कृत्रिम अंग मौके पर ही तैयार कर हितग्राहियों को लगाए जा रहे हैं। इससे कई लोगों के लिए सामान्य जिंदगी की ओर लौटने का रास्ता आसान हुआ है।
मुख्यमंत्री बोले- बस्तर अब विकास की नई दिशा में
शिविर का वर्चुअल शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर ने लंबे समय तक नक्सली हिंसा का दौर देखा है, लेकिन अब यह अंचल उस दौर से बाहर निकलकर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को उपकरण देना केवल सहायता नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण से जोड़ने की पहल है।
मुख्यमंत्री ने हिंसा में अपने अंग गंवाने वाले लोगों को भरोसा दिलाया कि वे खुद को अकेला न समझें। सरकार उनके साथ खड़ी है और बस्तर को केवल हिंसा से मुक्त करने के साथ शांत, सशक्त और विकसित क्षेत्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
आईईडी पीड़ितों को फिर अपने पैरों पर खड़ा करने की कोशिश
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित लोगों का पुनर्वास भी इस लड़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके मुताबिक आईईडी और बारूदी सुरंगों की वजह से जिन लोगों ने अपने अंग गंवाए हैं, उन्हें दोबारा आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है।
उन्होंने आईईडी विस्फोट में घायल ग्रामीण संतोष पोयाम के साथ ड्यूटी के दौरान घायल पुलिस जवान राकेश कुमार यादव और घासीराम मांझी का भी उल्लेख किया। कृत्रिम अंगों की मदद से ये लोग अब बिना सहारे चलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मौके पर बन रहे कृत्रिम हाथ-पैर
शिविर में विशेषज्ञों की टीम आधुनिक ऑन-साइट कार्यशाला के जरिए हितग्राहियों का नाप लेकर जरूरत के अनुसार कृत्रिम हाथ, पैर और कैलिपर्स तैयार कर रही है। पहले दिन ही 70 से अधिक हितग्राहियों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए।
इसके अलावा जरूरतमंदों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी और श्रवण यंत्र भी निःशुल्क दिए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम शिविर स्थल पर ही जांच कर मेडिकल सर्टिफिकेट उपलब्ध करा रही है। पात्र हितग्राहियों को दिव्यांग पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ने की प्रक्रिया की जा रही है।
पहले चरण में चार जिलों के हितग्राही
भारतीय जैन संघटना के डॉ. अतुल जैन ने बताया कि शिविर का आयोजन दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में 5 से 7 अक्टूबर तक बस्तर, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुर के हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है। इनमें अकेले बस्तर जिले के करीब 1,570 हितग्राही शामिल हैं।
दूसरे चरण में 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा में शिविर लगाया जाएगा, जिसमें दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के जरूरतमंदों को लाभ मिलेगा। शिविर के जरिए दूरदराज के इलाकों में रहने वाले दिव्यांगजनों तक सीधे सहायता पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
बस्तर में पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की नई तस्वीर
शिविर में पहुंचे हितग्राहियों के लिए कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने के साथ आत्मविश्वास लौटाने का माध्यम बन रहे हैं। लंबे समय तक हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर में पुनर्वास की यह पहल विकास के साथ मानवीय संवेदनाओं को भी सामने ला रही है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के बीच आयोजित यह महाशिविर इस बात की तस्वीर पेश करता है कि बस्तर में बदलाव केवल सड़कों और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंसा से प्रभावित लोगों को फिर से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।