गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : जिले की प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों को अब संरक्षण और संवर्धन की नई दिशा मिलने की उम्मीद है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश के बाद रायपुर से पहुंची पुरातत्व विशेषज्ञों की चार सदस्यीय टीम ने धनपुर समेत जिले के कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों का मैदानी सर्वे किया। टीम ने मौके पर मौजूद प्राचीन मूर्तियों, मंदिरों, पुरावशेषों और स्मारकों की स्थिति को करीब से देखा।

विशेषज्ञों ने धनपुर, बेनीबाई, भस्मासुर टापू और शहरखेरवा में पहुंचकर न सिर्फ इन स्थलों के ऐतिहासिक महत्व को समझने का प्रयास किया, बल्कि यह भी देखा कि इन्हें किस तरह बेहतर तरीके से संरक्षित और विकसित किया जा सकता है।

धनपुर की प्राचीन धरोहरों पर खास नजर

सर्वे के दौरान विशेषज्ञ दल ने धनपुर स्थित प्राचीन मंदिर और वहां मौजूद ऐतिहासिक मूर्तियों का बारीकी से निरीक्षण किया। मंदिर की संरचना, परिसर में बिखरे पुरातात्विक अवशेष और उनके रखरखाव की स्थिति का जायजा लिया गया।

इसके अलावा धनपुर-धोबहर धरोहर केंद्र में रखी प्राचीन मूर्तियों और अन्य पुरावशेषों को भी विशेषज्ञों ने देखा। टीम ने इनके संरक्षण, रखरखाव और भविष्य में बेहतर प्रबंधन की संभावनाओं पर भी अध्ययन किया।

बेनीबाई और भस्मासुर टापू भी पहुंचे विशेषज्ञ

सर्वेक्षण दल ने बेनीबाई और भस्मासुर टापू में मौजूद प्राचीन मूर्तियों और अन्य धरोहरों का भी निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने इन स्थलों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए संरक्षण की जरूरतों का आकलन किया।

वहीं शहरखेरवा में टीम ने उपलब्ध पुरातात्विक अवशेषों के साथ संभावित धरोहर स्थलों को भी देखा। यहां क्षेत्र की पुरातात्विक संभावनाओं को समझने के लिए मौके पर उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन किया गया।

कौन-कौन विशेषज्ञ पहुंचे?

रायपुर से आई टीम में पुरातत्ववेत्ता प्रभात कुमार सिंह, उत्खनन सहायक प्रवीण तिर्की, शोधकर्ता डॉ. राजीव जॉन मिंज और शोधकर्ता अमर भारद्वाज शामिल रहे। टीम ने अलग-अलग स्थलों पर जाकर मौके की स्थिति का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।

कलेक्टर ने ली सर्वे की जानकारी

मैदानी सर्वे पूरा होने के बाद कलेक्टर विजय दयाराम के. ने विशेषज्ञ दल के साथ बैठक की। इस दौरान सर्वे में सामने आई जानकारियों, धरोहरों की मौजूदा स्थिति और संरक्षण के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा हुई।

कलेक्टर ने पुरातात्विक मूर्तियों और स्मारकों के संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण से जुड़े जरूरी कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धनपुर क्षेत्र की प्राचीन धरोहरें जिले की पहचान हैं और इनके संरक्षण के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।

संरक्षण के साथ पर्यटन को भी मिल सकती है नई दिशा

धनपुर समेत इन ऐतिहासिक स्थलों का सर्वे केवल पुरातात्विक संरक्षण तक सीमित नहीं है। अगर इन स्थानों पर बेहतर रखरखाव, जरूरी सुविधाएं और व्यवस्थित विकास किया जाता है तो इन्हें विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन से भी जोड़ा जा सकता है।

इससे जिले के लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए नई पहचान मिल सकती है।

फिलहाल विशेषज्ञों के इस सर्वे को जिले की पुरातात्विक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले समय में सर्वे के आधार पर संरक्षण और विकास से जुड़े ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

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