उच्च शिक्षा में बढ़ा नामांकन, हर जिले में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और रिसर्च-इनोवेशन पर जोर
रायपुर, विकसित छत्तीसगढ़@2047 की दिशा में शिक्षा, नवाचार और युवा शक्ति को विकास का अहम आधार बनाया जा रहा है। उच्च शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित रखने के बजाय इसे रोजगार, कौशल और आधुनिक उद्योगों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के साथ प्रदेश में उच्च शिक्षा को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात (GER) 2021-22 में 19.6 प्रतिशत था, जो बढ़कर 27.5 प्रतिशत हो गया है। इसे वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं देने के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक सर्वसुविधायुक्त ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ महाविद्यालय विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। वहीं शोध और नए प्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए ‘राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना’ का खाका तैयार किया गया है। पाठ्यक्रमों में आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को भी शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता सुधारने के लिए नैक (NAAC) मूल्यांकन पर भी फोकस किया गया है। प्रदेश के 254 पात्र शासकीय महाविद्यालयों में से 200 और 9 विश्वविद्यालयों में से 5 का नैक मूल्यांकन पूरा हो चुका है।
शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 8 नए शासकीय महाविद्यालय, 5 नए निजी महाविद्यालय और 3 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल और क्रीड़ाधिकारी के पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
शिक्षा, नवाचार और युवाओं की क्षमता को केंद्र में रखकर किए जा रहे ये प्रयास विकसित छत्तीसगढ़@2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखे जा रहे हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को बेहतर शिक्षा और अवसरों से जोड़कर प्रदेश की विकास यात्रा में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है।