शिक्षिका सोना साहू के बहुचर्चित केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षकों के बीच रुपए उगाही शुरू हुई। कुछ शिक्षक संगठन बैंक अकाउंट खोलकर शिक्षकों को मैसेज और ग्रुप के माध्यम से सभी को क्रमोन्नति का फायदा दिलाने के लिए रुपए जमा करावा रहे हैं। इसके लिए शिक्षकों को बैंक अकाउंट नंबर और बारकोड भी भेजा जा रहा है। सोना साहू केस में 17 मार्च को फैसला आया और उसी दिन से यह खेल भी शुरू हुआ।

पत्रिका को एक खाते की जानकारी मिली, जिसमें लगभग 20 लाख रुपए जमा हो गए हैं। ऑनलाइन के साथ ही शिक्षक नगद पैसे भी दे रहे हैं। क्रमोन्नति वेतनमान दिलाने के नाम पर समिति बनाकर ऑनलाइन चंदा लेने का मामला अब विवादों से घिरता नजर आ रहा है। इसकी शिकायत राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) में हुई है। जिसमें चार शिक्षकों की नामजद शिकायत की गई है।
फायदा दिखाकर पैसे मांगने का खेल आज का नहीं है। शिक्षकों को समस्या बताकर पैसे तो इकट्ठा किए जाते हैं, उसके बाद पैसे का क्या हुआ और कहां गया? कुछ पता नहीं होता और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। शिक्षकों को मैसेज में कहा जा रहा है कि एलबी संवर्ग के हक की लड़ाई में सभी का सहयोग जरूरी है। सोना साहू को सर्वोच्च न्यायालय में केस जीतने हेतु स्वच्छा से अपना सहयोग राशि दें। केस जीतने पर हमारे पूूर्व सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से होगी। जबकि केस में हुआ ये है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट ने सोना साहू को सभी परिणामी क्षतिपूर्ति का पात्र बताते हुए शिक्षा सचिव को 23 अप्रैल तक आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया है।

समिति बनाकर चंदा

जानकारी के अनुसार, सोना साहू प्रकरण में चंदा और श्रेय लेने की होड़ मची है। जबकि सोना साहू को अब तक सभी लाभ नहीं मिले हैं। प्रदेशभर के वाट्सअप ग्रुपों में लिंक भरकर पैसे मांगे जा रहे हैं। शिक्षकों के कुछ संगठनों से जुड़े शिक्षक ही लोकल बॉडी विधिक संघर्ष समिति बनाकर रकम इकट्ठा कर रहे हैं, पर ये किस न्यायालय में केस लगाएंगे और जीत की क्या गारंटी होगी, यह नहीं बताया जा रहा।

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