रायपुर, छत्तीसगढ़ में जल संसाधनों के संतुलित उपयोग और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में राज्य जल संसाधन उपयोग समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न जिलों की औद्योगिक इकाइयों को वार्षिक जल आबंटन और नए प्रस्तावों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने पेयजल आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और किसानों के लिए सिंचाई जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में स्पंज आयरन, पावर प्लांट, सीमेंट और अन्य विनिर्माण इकाइयों को जलाशयों एवं नदियों से दिए जाने वाले जल की समीक्षा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उद्योग स्वीकृत सीमा के भीतर ही जल का उपयोग करें और जल शुल्क का भुगतान समय पर करें। कृषि, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया, ताकि आगामी शुष्क मौसम में पानी की कमी का सामना न करना पड़े।
जल संरक्षण और रीसाइक्लिंग पर जोर
मुख्य सचिव ने औद्योगिक इकाइयों को जल संरक्षण के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक अपनाने, वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने और वर्षा जल संचयन व्यवस्था प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में राज्य भू-जल प्रबंधन एवं नियमन प्राधिकरण के गठन के संबंध में भी चर्चा की गई।
बैठक में मिशन अमृत 2.0 और अन्य योजनाओं के तहत कुल नौ पेयजल प्रदाय योजनाओं के जल आबंटन की पुष्टि एवं अनुमोदन किया गया। इससे नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और समिति के सदस्य उपस्थित रहे।