रायपुर : धमतरी के लाइवलीहुड कॉलेज में जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन ट्राइफेड (TRIFED) और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय ‘जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता (एम्पैनलमेंट) मेला’ आयोजित किया गया। मेले का उद्देश्य स्थानीय जनजातीय कारीगरों और कलाकारों को व्यापक बाजार, बेहतर विपणन तथा राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना रहा।

मेले में जिले के 20 कलाकारों एवं कारीगरों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों और जनजातीय उद्यमियों को ट्राइफेड से सूचीबद्ध होने का अवसर मिला।

जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि ट्राइफेड से जुड़ने के बाद कारीगरों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों, ‘जनजातीय भारत’ बिक्री केंद्रों और विभिन्न मेलों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार और कारीगरों को आय के नए अवसर मिलेंगे।

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कारीगरों को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर अपने उत्पादों को देश-दुनिया तक पहुंचाने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं को प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर ध्यान देने के साथ लाख, इमली, सतावर सहित अन्य वन उपज के वैज्ञानिक प्रसंस्करण को आय का माध्यम बनाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि जनजातीय कारीगरों के लिए विशेष प्रशिक्षण बैच तैयार कर उन्हें सोशल मीडिया मार्केटिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार प्रबंधन और उत्पाद प्रस्तुतीकरण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मेले में वस्त्र एवं हस्तकला, धातु शिल्प, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद, मिट्टी शिल्प, बांस-बेंत शिल्प, जनजातीय आभूषण, चित्रकला सहित विभिन्न उत्पाद प्रदर्शित किए गए। अधिकारियों और अतिथियों ने स्टॉलों का अवलोकन कर कारीगरों से उत्पादों की मांग, बाजार और आय की जानकारी ली।

सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष जे.एल. ध्रुव ने कहा कि उचित बाजार और मार्केट लिंकेज मिलने से जनजातीय कारीगरों की आय बढ़ने के साथ पारंपरिक कला को राष्ट्रीय पहचान मिल सकती है।

सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ने बताया कि यह मेला जिले के कारीगरों और उद्यमियों को ट्राइफेड के व्यापक विपणन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

By Author1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *