जगदलपुर : रक्षाबंधन के अवसर पर बस्तर की ग्रामीण महिलाओं की रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता की झलक जगदलपुर कलेक्टोरेट परिसर में देखने को मिली। विकासखंड जगदलपुर, बकावंड और बस्तर समेत विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के महिला स्व-सहायता समूहों ने प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल राखियों की प्रदर्शनी-सह-बिक्री लगाई।

प्रदर्शनी में स्थानीय हुनर से तैयार राखियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। कलेक्टर आकाश छिकारा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और सहायक कलेक्टर ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने महिलाओं के बनाए उत्पादों की सराहना करते हुए स्वयं राखियां खरीदकर उनका उत्साह बढ़ाया।

धान, बीज, बांस और कौड़ियों से तैयार हुईं खास राखियां

महिला समूहों ने राखियों को तैयार करने में धान, चावल, लालभाजी और खीरे के बीज, मयूर पंख, बांस, प्राकृतिक धागों और कौड़ियों जैसी स्थानीय सामग्रियों का इस्तेमाल किया। इन राखियों में बस्तर की लोककला, प्राकृतिक विविधता और पारंपरिक संस्कृति की झलक दिखाई दी।

कलेक्टोरेट परिसर में पहुंचे अधिकारी-कर्मचारियों और आम नागरिकों ने भी इन हस्तनिर्मित राखियों में रुचि दिखाई और जमकर खरीदारी की। इससे महिलाओं के स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और उनके हुनर को पहचान दिलाने में मदद मिली।

प्रशिक्षण के बाद समूहों ने शुरू किया बड़े स्तर पर उत्पादन

ग्रामीण महिलाओं को राखी निर्माण का प्रशिक्षण देने के लिए जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, आड़ावाल द्वारा 21 से 26 जुलाई तक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था। इसमें जिले के सातों जनपदों से आई 30 महिला प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण में महिलाओं को राखी के डिजाइन, रंग संयोजन, गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्राकृतिक सामग्रियों के इस्तेमाल से आकर्षक उत्पाद तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों की अन्य सदस्यों को भी इस कार्य से जोड़ा और बड़े स्तर पर राखियों का निर्माण किया।

सीधे बाजार से जुड़ीं महिलाएं, मिला उचित मूल्य

कलेक्टोरेट में आयोजित प्रदर्शनी-सह-बिक्री ने महिलाओं को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर दिया। बिचौलियों के बिना बिक्री होने से महिलाओं को उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बनी और उनकी आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी मजबूत हुए।

पर्यावरण संरक्षण के साथ ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा

प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार राखियों ने पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी मजबूत किया। बस्तर की महिलाओं ने अपने पारंपरिक हुनर और स्थानीय संसाधनों को बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

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