रायपुर, सेवा का अर्थ सिर्फ किसी जरूरतमंद तक मदद पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। किसी गरीब परिवार की रसोई में गैस की नीली लौ जलना, जरूरतमंद की थाली तक राशन पहुंचना, किसी गांव में सुविधाओं का विस्तार होना या कोई नागरिक स्वच्छता के लिए अपना समय देना—ये ऐसे छोटे कदम हैं, जिनका असर लोगों के जीवन पर बड़ा होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू हुआ ‘सेवा संकल्प अभियान’ सेवा और जनभागीदारी के इसी भाव को सामने लाने का माध्यम बन रहा है। अभियान के जरिए जहां प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन की यात्रा के प्रति आभार व्यक्त किया जा रहा है, वहीं नागरिकों को भी विकसित भारत के निर्माण में अपने योगदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
रक्तदान, जरूरतमंद की मदद, स्वच्छता के लिए श्रमदान या नदी-घाट की सफाई जैसी पहल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती। जब समाज के लोग अपनी जिम्मेदारी समझकर आगे आते हैं तो छोटी-छोटी कोशिशें सामूहिक बदलाव का रूप लेती हैं। स्वच्छ भारत अभियान ने भी स्वच्छता को केवल सरकारी व्यवस्था न मानकर जनभागीदारी से जोड़ने का संदेश दिया। इसी तरह नमामि गंगे जैसे प्रयासों में नदियों और पर्यावरण के संरक्षण के लिए लोगों की भागीदारी पर जोर दिया गया।
गरीब कल्याण से जुड़ी योजनाओं का असर भी सेवा के इसी व्यापक भाव से जुड़ता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली, जिससे पारंपरिक ईंधन से होने वाले धुएं से राहत पाने में मदद मिली। वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की व्यवस्था ने खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।
छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली लाखों परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। उचित मूल्य की दुकानों के जरिए चावल और अन्य आवश्यक खाद्यान्न पात्र परिवारों तक पहुंचता है। इस व्यवस्था की अहमियत उस समय और ज्यादा महसूस होती है, जब दूरस्थ इलाकों में रहने वाले परिवारों तक भी राशन पहुंचता है। बस्तर जैसे जनजातीय और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में नियद नेल्लानार जैसी पहलों के जरिए शासन की सुविधाओं को दूरदराज के गांवों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
सेवा की असली तस्वीर किसी योजना के आंकड़ों से आगे लोगों के अनुभवों में दिखाई देती है। राशन की दुकान पर पहुंचने वाला परिवार सिर्फ एक राशन कार्ड नंबर नहीं, बल्कि जरूरतों और उम्मीदों से जुड़ा परिवार है। इसी तरह किसी दूरस्थ गांव तक सुविधा पहुंचना केवल सरकारी सेवा का विस्तार नहीं, बल्कि नागरिक और शासन के बीच भरोसे को मजबूत करने वाला कदम भी है।
‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी से भी होगा। सरकार योजनाएं और संसाधन उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उन्हें जनआंदोलन बनाने में नागरिकों की भूमिका अहम है। रक्तदान करने वाला व्यक्ति, स्वच्छता अभियान में शामिल युवा, नदी-घाट की सफाई करने वाला नागरिक या किसी जरूरतमंद को सरकारी योजना की जानकारी देने वाला व्यक्ति—हर कोई अपने स्तर पर योगदान दे सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने का अवसर इसी जिम्मेदारी को याद करने का मौका भी है। राष्ट्र निर्माण हमेशा बड़े अभियानों से ही नहीं होता। कई बार इसकी शुरुआत एक परिवार की रसोई, किसी जरूरतमंद की थाली, साफ किए गए घाट या रक्तदान जैसी छोटी पहल से होती है। सेवा से संकल्प और संकल्प से विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए सरकार के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है।