रायपुर : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने ब्रांड के लोगो और कैटलॉग का विमोचन किया तथा रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के हितग्राहियों और मेधावी विद्यार्थियों को 10.90 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता एवं पुरस्कार राशि वितरित की। साथ ही हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई और पारंपरिक हथकरघा उत्पाद अब राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक पहचान बना रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य इन उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की नई पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक डिजाइन, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और नए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हथकरघा हमारी संस्कृति, रोजगार और आत्मनिर्भरता की सशक्त पहचान है।

मुख्यमंत्री ने बुनकरों और शिल्पकारों के लिए सरकार की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 469 बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास स्वीकृत किए गए हैं। 47 प्रदर्शनियों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई है। वहीं 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। इसके अलावा शासकीय विभागों द्वारा 436 करोड़ रुपये के हथकरघा वस्त्रों की खरीदी कर बुनकरों को आर्थिक संबल दिया गया है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वदेशी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभिन्न स्टॉलों पर पहुंचकर कारीगरों से संवाद किया। उन्होंने हथकरघा स्टॉल से स्वयं भुगतान कर कोसा साड़ी खरीदी और कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद ही बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम का सबसे बड़ा सम्मान है। इस अवसर पर बस्तर की आत्मसमर्पित महिलाओं ने पारंपरिक कोसा परिधानों में रैंप वॉक कर बदलते बस्तर और सम्मानजनक पुनर्वास की प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत की, जिसकी सभी ने सराहना की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘कोशल फैब’ ब्रांड ‘लूम टू लग्जरी’ की अवधारणा पर आधारित है, जो छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम में 935 मेधावी छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि, 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान, 49 बुनकरों के लिए आवास स्वीकृति, पांच सहकारी समितियों को भवन निर्माण सहायता तथा शिल्पकारों और रेशम कृषकों को भी विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए गए। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से ‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान से जुड़कर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील भी की।

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