रायपुर, नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में कृषि विभाग की प्रदर्शनी किसानों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। यहां एक ही स्थान पर 20 से अधिक धान की उन्नत किस्मों के साथ पारंपरिक सुगंधित धान, दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों का प्रदर्शन किया गया है। कृषि विभाग के विशेषज्ञ किसानों को विभिन्न फसलों की विशेषताओं, उत्पादन क्षमता, बीजों के संरक्षण और आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं। प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को पारंपरिक कृषि विरासत से जोड़ने के साथ फसल विविधीकरण के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों की पहचान रखने वाली पारंपरिक सुगंधित धान की किस्में विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इनमें कोरिया का श्री कमल, सूरजपुर का श्याम जीरा, बलरामपुर का ठाकुर भोग, सरगुजा का विष्णु भोग, जशपुर का शीतल भोग, बिलासपुर का समुंद चीनी, रायगढ़ का जौ फूल, कबीरधाम का गंगा प्रसाद, जांजगीर-चांपा का चिन्नौर, रायपुर और बालोद का दुबराज तथा महासमुंद का कुबरी मोहर सहित विभिन्न जिलों की पारंपरिक किस्में प्रदर्शित की गई हैं। इसके अलावा 20 से अधिक उन्नत धान प्रजातियों में महामाया, तरुण भोग, छत्तीसगढ़ देवभोग, छत्तीसगढ़ जिंक राइस-1, रेड राइस, ब्लैक राइस, स्वर्णा सब-1, आईआर-64 और बस्तर धान-1 जैसी किस्में भी रखी गई हैं। विशेषज्ञ किसानों को इनकी उत्पादकता, पोषण संबंधी विशेषताओं और बाजार में मांग के बारे में जानकारी दे रहे हैं। किसानों को धान के स्थान पर अन्य फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना की जानकारी भी दी जा रही है। योजना के तहत खरीफ मौसम में धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी और कपास की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा पहले से इन वैकल्पिक फसलों की खेती कर रहे किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की आदान सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है। प्रदर्शनी में दलहन की उन्नत किस्मों में चना, तिवड़ा, मूंग, उड़द, अरहर, मसूर, मटर और कुल्थी के प्रमाणित बीजों के साथ उनकी खेती की तकनीक भी बताई जा रही है। रबी मौसम के लिए गेहूं की अवंति और कनिष्का किस्मों की जानकारी भी किसानों को दी जा रही है। तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनी में अलसी, सरसों, कुसुम, सूरजमुखी, सोयाबीन, रामतिल और तिल की विभिन्न उन्नत किस्में रखी गई हैं। अलसी की 12 किस्मों के साथ सरसों की आजाद महक, सुरेखा और आरएच-1975, कुसुम की छत्तीसगढ़ कुसुम-1 और छत्तीसगढ़ कुसुम-2 तथा सूरजमुखी की सीओएच-4 और सन एच-1 जैसी प्रजातियों का प्रदर्शन किया गया है। वहीं सोयाबीन की सीजी सोया-1, रामतिल की जीए-10 और तिल की जीटी-10 जैसी किस्मों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही लघु धान्य फसल सीजी कोदो-2 की खेती की तकनीक से किसानों को परिचित कराया जा रहा है। कृषि विभाग की यह प्रदर्शनी किसानों को नई तकनीकों और उन्नत बीजों से जोड़ने के साथ खेती में नए विकल्प अपनाने का अवसर भी दे रही है। विशेषज्ञों से सीधे संवाद के जरिए किसान अपनी जरूरतों के अनुसार फसलों का चयन, उत्पादन बढ़ाने के तरीके और बाजार की संभावनाओं को समझ रहे हैं। पारंपरिक बीजों के संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वय से छत्तीसगढ़ में खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

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