रायपुर, छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की विकास यात्रा केवल उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान, स्वाभिमान और परंपराओं को सहेजते हुए आगे बढ़ने का सफर भी है। 1 नवंबर 2000 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ ने इन वर्षों में विकास के कई नए आयाम स्थापित किए हैं। राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव ने प्रदेश की इसी गौरवशाली विरासत और विकास यात्रा को एक मंच पर प्रस्तुत किया। नवा रायपुर में आयोजित इस समारोह में लोकसंस्कृति, कला, शिल्प, पर्यटन और सरकारी योजनाओं की झलक देखने को मिली। अलग राज्य का गठन छत्तीसगढ़ की जनता की वर्षों पुरानी आकांक्षाओं और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने वाला ऐतिहासिक निर्णय था। अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रदेश को अपनी विकास यात्रा तय करने का अवसर दिया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन, जनकल्याण और विकास को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और प्रदेश की पारंपरिक पहचान भी सुरक्षित रहे। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति प्रदेश की सबसे बड़ी पहचान है। बस्तर दशहरा, पंथी नृत्य, राउत नाचा, पंडवानी, सुआ और करमा जैसी लोकपरंपराएं यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं। संस्कृति विभाग द्वारा इन कलाओं के संरक्षण, कलाकारों को प्रोत्साहन और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यटन और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, लोककलाकार केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के सच्चे संवाहक हैं। इसलिए उन्हें मंच, सम्मान और अवसर उपलब्ध कराना सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है। 1 से 3 नवंबर तक आयोजित राज्योत्सव 2026 में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन हुआ। समारोह में पंडवानी, पंथी, सुआ और जनजातीय लोकनृत्यों के साथ कथक और ओडिसी जैसी शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। शिल्पग्राम में स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिला, वहीं विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों के माध्यम से सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी दी गई। स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक दलों की भागीदारी ने आयोजन को जनभागीदारी और सांस्कृतिक उत्सव का स्वरूप दिया। राज्योत्सव का समापन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर आयोजित राज्य अलंकरण समारोह में कला, साहित्य, संस्कृति, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। इन सम्मानों के माध्यम से प्रदेश की प्रतिभाओं और उनके योगदान को पहचान मिली। समारोह ने छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की उपलब्धियों को याद करने के साथ आने वाली पीढ़ियों को समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देने की प्रेरणा भी दी। राज्योत्सव 2026 का समापन प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और विकास की नई संभावनाओं को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ। अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदर्शी सोच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं। लोककलाओं को व्यापक पहचान दिलाना, कलाकारों को प्रोत्साहन देना और पर्यटन के माध्यम से रोजगार व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना इस यात्रा के महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं। राज्योत्सव का यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नई शुरुआत का संदेश भी दे गया।

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