रायपुर : छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के मुद्दे पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा बयान दिया है। एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में सीएम साय ने कहा कि कुख्यात नक्सली हिड़मा जैसे लोगों को आदर्श मानने वाले ही ‘दिमागी नक्सली’ हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर सैकड़ों निर्दोष लोगों की हत्या से जुड़े होने के आरोप रहे हों, उसे नायक के तौर पर पेश करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय तक नक्सली हिंसा का दंश झेलता रहा है। बस्तर में हिंसा के कारण आम लोगों के साथ-साथ सुरक्षाबलों और जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी जान गंवाई। ऐसे में हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों का महिमामंडन उन परिवारों के जख्मों को और गहरा करता है, जिन्होंने अपनों को खोया है।
सीएम साय ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई सिर्फ बंदूक और सुरक्षा अभियान तक सीमित नहीं है। हिंसा को सही ठहराने और नक्सली हिंसा से जुड़े लोगों को नायक बताने वाली मानसिकता के खिलाफ भी समाज को स्पष्ट रुख अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन निर्दोष लोगों की हत्या और हिंसा का समर्थन स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री के मुताबिक बस्तर अब बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कभी नक्सली हिंसा और भय के लिए पहचाने जाने वाले इलाकों में अब सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार के अवसरों का विस्तार हो रहा है। दूरदराज के गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर का युवा अब बंदूक नहीं, बल्कि किताब, कौशल और रोजगार को अपना भविष्य बनाना चाहता है। सरकार की कोशिश है कि युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलें और वे अपने सपनों को पूरा कर सकें।
सीएम साय ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष दरअसल बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। सुरक्षाबलों के साहस और बस्तर के लोगों के सहयोग से प्रदेश अब शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नए छत्तीसगढ़ में हिंसा और नक्सलवाद के लिए कोई जगह नहीं है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श ऐसे लोग होने चाहिए, जो शिक्षा, मेहनत, सेवा, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के जरिए समाज को आगे बढ़ा रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता अब बस्तर में शांति को स्थायी बनाकर उसे विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान दिलाना है।