जगदलपुर : बस्तर की ऐतिहासिक पहचान और जगदलपुर की शान माने जाने वाले दलपत सागर के अच्छे दिन लौटने वाले हैं। लंबे समय से जलकुंभी की समस्या से जूझ रहे इस ऐतिहासिक सरोवर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए अब बड़ा कदम उठाया गया है। जगदलपुर नगर निगम और NMDC नगरनार इस्पात संयंत्र के बीच इसके लिए एमओयू हुआ है।
एमओयू के तहत NMDC नगरनार अपने CSR फंड से दलपत सागर की सफाई और संरक्षण के लिए कुल 50 लाख रुपये खर्च करेगा। इसके तहत पहले चरण के लिए 20 लाख रुपये की पहली किस्त जारी भी कर दी गई है। इस राशि से सरोवर में फैली जलकुंभी को हटाने के साथ जरूरी सफाई और संरक्षण का काम किया जाएगा।
जलकुंभी बनी थी बड़ी समस्या
दलपत सागर में लंबे समय से बड़ी मात्रा में जलकुंभी फैल गई थी। इससे सरोवर की खूबसूरती प्रभावित होने के साथ पानी की सतह का बड़ा हिस्सा भी ढक गया था। पर्यावरण प्रेमियों और शहरवासियों की ओर से लगातार इसकी सफाई की जरूरत उठाई जा रही थी।
अब नगर निगम और NMDC के सहयोग से जलकुंभी हटाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इसके बाद सरोवर के संरक्षण और बेहतर रखरखाव पर भी फोकस किया जाएगा।
पर्यटन को भी मिलेगा फायदा
दलपत सागर सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है। इसके साफ-सुथरे और बेहतर स्वरूप में लौटने से शहर की खूबसूरती बढ़ने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकार और स्थानीय प्रशासन का मानना है कि दलपत सागर का संरक्षण पर्यावरण के साथ-साथ शहर की पर्यटन संभावनाओं और नागरिक सुविधाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरोवर के कायाकल्प के बाद स्थानीय लोगों और पर्यटकों को बेहतर वातावरण मिल सकेगा।
इस पहल को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन तथा जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव और महापौर संजय पाण्डे के प्रयासों से आगे बढ़ाया गया है। एमओयू के दौरान कलेक्टर, अपर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और NMDC नगरनार के कार्यकारी निदेशक टीपी सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।