गौरेला-पेंड्रा-मरवाही : प्राकृतिक खूबसूरती के लिए पहचाने जाने वाला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही अब अपने खास विष्णुभोग सुगंधित चावल के कारण भी अलग पहचान बना रहा है। केंद्र सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना में शामिल विष्णुभोग अपनी खुशबू और स्वाद के चलते स्थानीय बाजार से आगे प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंच रहा है।
पेंड्रा क्षेत्र में करीब 1,500 किसान 600 एकड़ जमीन में विष्णुभोग धान की खेती कर रहे हैं। किसानों के लिए यह फसल अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनने के साथ जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।
खेती से पैकेजिंग तक महिलाओं की भागीदारी
विष्णुभोग को बाजार तक पहुंचाने में महिला उद्यमियों की भी अहम भूमिका है। मलनिया महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, पेंड्रा किसानों से विष्णुभोग धान खरीदती है। इसके बाद मिनी राइस मिल में धान की प्रोसेसिंग कर चावल को पैक और ब्रांडिंग के साथ बाजार में उतारा जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया में समूह की 15 महिला सदस्य जुड़ी हुई हैं। इससे उन्हें नियमित रोजगार का अवसर मिला है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
2 टन चावल बेचकर करीब 1 लाख रुपये का लाभ
महिला समूह अब तक करीब 2 टन विष्णुभोग चावल की बिक्री कर चुका है। इससे समूह को लगभग 1 लाख रुपये का लाभ मिला है।
महिलाओं का कहना है कि पहले स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने के अवसर सीमित थे। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बिक्री जैसे कामों में भागीदारी का मौका मिला है।
किसानों को भी मिल रहा बाजार
विष्णुभोग को ‘एक जिला-एक उत्पाद’ के रूप में बढ़ावा मिलने से किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद बढ़ी है। उत्पादन के साथ अब प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इससे पारंपरिक धान की खेती को नए बाजार से जोड़ने का रास्ता तैयार हो रहा है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
जीपीएम की नई पहचान बन रहा विष्णुभोग
विष्णुभोग चावल की बढ़ती मांग ने जीपीएम के किसानों और महिला उद्यमियों के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। एक तरफ किसान इसकी खेती से जुड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर महिलाएं इसकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में अपनी भूमिका बढ़ा रही हैं।
अगर उत्पादन और बाजार का विस्तार इसी तरह जारी रहा, तो जीपीएम का विष्णुभोग चावल आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के खास कृषि उत्पादों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।