रायपुर : सुशासन सिर्फ सरकारी योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जब शासन की पहुंच गांव के अंतिम व्यक्ति तक हो और उसकी छोटी-बड़ी जरूरतों को सुना जाए, तब इसका असली मतलब सामने आता है। छत्तीसगढ़ में आयोजित सुशासन तिहार ने इसी सोच को जमीन पर उतारने का काम किया।

बस्तर के आयतु से लेकर सरगुजा के तिहारू और धमतरी के नगरी क्षेत्र के ईतवारी राम कमार तक ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं और जरूरतें सीधे सरकार के सामने रखीं। राशन समय पर मिल रहा है या नहीं, गांव में हैंडपंप की जरूरत है या तालाब में घाट बनना चाहिए—ऐसे स्थानीय मुद्दों पर ग्रामीणों को अपनी बात रखने का मौका मिला।

गांवों की चौपाल तक पहुंचा प्रशासन

सुशासन तिहार के दौरान अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की टीमों ने गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। कई जगह अधिकारी रात में गांवों में रुके और चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुनीं।

ग्रामीणों ने हैंडपंप, तालाब में घाट, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी भवन, सड़क और विद्युत लाइन जैसी जरूरतों को सामने रखा। स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और मध्यान्ह भोजन से जुड़े मुद्दे भी ग्रामीणों ने उठाए।

तपती दोपहरी में गांव पहुंचे मुख्यमंत्री

अभियान के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी कई गांवों का औचक दौरा कर ग्रामीणों से सीधे बातचीत की। कई ग्रामीण इलाकों में हेलीकॉप्टर से मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने पर लोगों में उत्सुकता दिखी। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और जरूरत के अनुसार कई मांगों को मौके पर ही मंजूरी दी।

सरकार की ओर से इस वर्ष 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में सुशासन तिहार का आयोजन किया गया।

33 जिलों में चला अभियान

इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों के 146 विकासखंडों में अधिकारियों-कर्मचारियों की टीमें गठित की गईं। प्रदेश की करीब 11,693 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले गांवों में अभियान दलों ने पहुंचकर लोगों से संवाद किया।

इस दौरान शासन की योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन भी देखा गया। त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भी अभियान में भाग लिया।

राशन से लेकर बिजली और रोजगार तक की हुई समीक्षा

सुशासन तिहार के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की जांच की गई। दूरस्थ क्षेत्रों में मानसून से पहले जरूरी वस्तुओं के भंडारण की स्थिति भी देखी गई।

इसके अलावा मनरेगा और अन्य रोजगारमूलक कार्यों, मजदूरी भुगतान, राजस्व मामलों में नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन, पेयजल व्यवस्था, बिजली लाइन और ट्रांसफार्मर के रखरखाव जैसे मुद्दों की भी समीक्षा की गई।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कृषि पंपों के विद्युतीकरण से जुड़ी स्थिति भी अधिकारियों ने जानी।

जनता से सीधा संवाद बना सुशासन की पहचान

सुशासन तिहार का सबसे अहम पहलू रहा सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद। गांव की चौपाल पर ग्रामीणों को अपनी बात रखने का अवसर मिला और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति को समझा।

यही वजह है कि सुशासन की अवधारणा अब सिर्फ सरकारी शब्दावली तक सीमित नहीं रह गई है। तिहारू जैसे ग्रामीणों के लिए सुशासन का मतलब अब यह है कि उनकी बात सुनी जाए, समस्या का समाधान हो और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में उन तक पहुंचे।

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