School dropout children admission Chhattisgarh

शाला छोड़ चुके बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकारें और विभिन्न संगठन विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे हैं, जिनमें बच्चों को उनकी उम्र और स्तर के अनुसार फिर से दाखिला दिलाने से पहले विशेष मॉड्यूल पर प्रशिक्षित किया जाता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ना है, ताकि वे अपनी शिक्षा पूरी कर सकें और भविष्य में समाज में योगदान दे सकें।

विभिन्न परिस्थितियों के कारण शाला छोड़ चुके बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने सरगुजा जिला प्रशासन की पहल अब रंग ला रही है। कलेक्टर के निर्देशानुसार शिक्षा विभाग द्वारा विकासखण्ड स्तरीय समिति का गठन किया गया। जिले में विशेष अभियान चलाकर शाला त्यागी बच्चों का चिन्हांकन किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज विकासखण्ड लुण्ड्रा के छेरमुंडा संकुल के विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा के 06 शालात्यागी बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाया गया। जिला कलेक्टोरेट सभाकक्ष में कलेक्टर ने इन बच्चों को पुस्तक, स्कूल ड्रेस सहित अन्य सामग्री प्रदान कर औपचारिक शाला प्रवेश कराया। अध्ययन सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आ गई, बच्चों ने कहा कि अब हम स्कूल जाना नहीं छोड़ेंगे।

कलेक्टर ने इस दौरान उपस्थित बच्चों के माता-पिता को शिक्षा की महत्ता को बताते हुए बच्चों को नियमित स्कूल भेजने प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ने कहा एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को लगातार इसकी मॉनिटरिंग के निर्देश दिए तथा शाला त्यागी बच्चों के पालकों को शाला भेजने प्रेरित और प्रोत्साहित करने निर्देशित किया। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नर सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

इन बच्चों का हुआ शाला प्रवेश

विकासखण्ड लुण्ड्रा के छेरमुंडा संकुल के विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बच्चों को प्राथमिक शाला गोती डुमर की कक्षा तीसरी में कुमारी बुटु एवं कक्षा दूसरी में दिनेश को प्रवेश दिलाया गया। वहीं माध्यमिक शाला आसनडीह में कक्षा छठवीं में लबिता, मुनेश्वर एवं अनूकसाय, कक्षा आठवीं में धनेश्वरी को प्रवेश दिलाया गया।

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