302 बुनकर समितियों और 128 महिला स्व-सहायता समूहों को मिला पारिश्रमिक, सीधे बैंक खातों में पहुंची राशि
रायपुर, दीपावली से पहले छत्तीसगढ़ के बुनकरों और सिलाई कार्य से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों को बड़ी सौगात मिली है। राज्य सरकार ने उनके मेहनताने के रूप में कुल 9 करोड़ 41 लाख रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में अंतरित की है। इससे त्योहार के मौके पर हजारों परिवारों को आर्थिक राहत मिली है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप ग्रामोद्योग मंत्री गजेन्द्र यादव के निर्देश पर यह भुगतान किया गया है। मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को उनके परिश्रम का समय पर भुगतान करना सरकार की प्राथमिकता है। स्थानीय हुनर को रोजगार से जोड़कर महिलाओं और बुनकरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वोकल फॉर लोकल की भावना के अनुरूप बुनाई और गणवेश सिलाई के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महिलाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार का दायरा बढ़ाकर उनकी आय में वृद्धि करना सरकार का प्रमुख उद्देश्य है।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा के अनुसार, अक्टूबर 2026 में प्रदेश के 26 जिलों की 302 बुनकर सहकारी समितियों को 7 करोड़ 60 लाख रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा 3 नवंबर को 49 बुनकर सहकारी समितियों को 1 करोड़ 50 लाख रुपये और 128 महिला स्व-सहायता समूहों को 31 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की गई।
चालू वित्तीय वर्ष में 76.13 करोड़ रुपये का भुगतान
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3 नवंबर तक राज्य हाथकरघा संघ द्वारा कुल 76 करोड़ 13 लाख 54 हजार रुपये सीधे बैंक खातों में भेजे जा चुके हैं। इसमें 345 बुनकर सहकारी समितियों को बुनाई पारिश्रमिक के रूप में 54 करोड़ 87 लाख रुपये और 2005 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई कार्य के लिए 21 करोड़ 17 लाख रुपये का भुगतान शामिल है।
बुनकर परिवारों को आर्थिक सहायता, महिलाओं को स्वरोजगार
बुनकरों के कल्याण के लिए भी विभाग की ओर से सहायता दी गई है। आकस्मिक मृत्यु होने पर 29 आश्रित परिवारों को 5 लाख 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। वहीं, हाथकरघा क्षेत्र के 11 पुरस्कृत हितग्राहियों को 3 लाख 74 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है।
इसके अलावा सुकमा, बस्तर, कोरबा और जशपुर जिले की 30 पुनर्वासित महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का विशेष प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की गई है। राज्य हाथकरघा संघ के अनुपयोगी और कटपीस कपड़ों से खिलौने, बैग और वाटर बैग जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार करवाए जाएंगे। महिलाओं को घर पर ही निःशुल्क सिलाई मशीन उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे नियमित रूप से काम कर आय अर्जित कर सकें।