रायपुर : छत्तीसगढ़ में हाथकरघा और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित स्वदेशी फैशन शो में सुकमा की 9 पुनर्वासित महिलाओं ने स्वेच्छा से रैंप वॉक कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। महिलाओं ने बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम के कोसा और कॉटन से तैयार परिधान पहनकर आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया।
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर 7 अगस्त को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में स्वदेशी फैशन शो और ग्रामोद्योग हाथकरघा प्रदर्शनी आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के हाथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देना और बुनकरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ स्वदेशी उत्पादों को नई पहचान दिलाना था।
ग्रामोद्योग विभाग ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में शामिल हुईं सभी 9 महिलाओं ने अपनी लिखित सहमति दी थी और उनकी भागीदारी पूरी तरह स्वैच्छिक थी। विभाग के अनुसार, इस पहल से पुनर्वासित महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिली है।
महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बस्तर संभाग के 8 पुनर्वास केंद्रों के 160 हितग्राहियों को हाथकरघा वस्त्र बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए 54.40 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क करघे और आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे घर से ही रोजगार और आय अर्जित कर सकें।
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने कहा कि पुनर्वासित हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़ना उनके स्थायी पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण है। हाथकरघा प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने के नए अवसर मिलेंगे।