छत्तीसगढ़ के रायपुर मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में MBBS व बीडीएस कोर्स में प्रवेश के लिए 4 मई को होने वाली नीट यूजी में पहली बार छात्रों की वीडियोग्राफी की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) परीक्षा में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ये कवायद कर रही है। इस बार छात्रों को परीक्षा केंद्र में तीन घंटे पहले प्रवेश लेना होगा। पहले डेढ़ घंटे सेंटरों में प्रवेश दिया जाएगा।

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार एनटीए के ये दो अहम बदलाव नीट यूजी को बिना विवाद संपन्न कराने में मदद करेगा। एनटीए की जारी गाइडलाइन के अनुसार छात्रों को परीक्षा केंद्रों में खड़े होकर वीडियोग्राफी करानी होगी। इससे कोई छात्र इनकार भी नहीं कर सकता। बताया जा रहा है कि ये कवायद इसलिए भी की जा रही है कि काउंसलिंग के दौरान अगर गड़बड़ी की शिकायत आई तो इस वीडियो से मिलान किया जाएगा।
दरअसल कई बार शिकायतें मिलती रही हैं कि परीक्षा किसी छात्र ने दी और काउंसलिंग में किसी अन्य छात्र ने हिस्सा लेकर एडमिशन ले लिया। वीडियोग्राफी से ये समस्या नहीं रहेगी। नीट-यूजी की सिटी इंटिमेशन स्लिप 26 अप्रैल को और एडमिट कार्ड 1 मई को जारी किए जाएंगे।

लगाए जाएंगे जैमर, कंट्रोल रूम से निगरानी

एनटीए ने इस बार परीक्षा के लिए 552 शहरों में सेंटर बनाया है। पिछले साल इसकी संख्या 557 थी। प्रदेश में 42 हजार से ज्यादा छात्र नीट यूजी देंगे। परीक्षा तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच होगी। परीक्षा केंद्रों में जैमर लगाए जाएंगे। कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा, जहां पर परीक्षा की निगरानी की जाएगी।

हर जिलों में कलेक्टर-एसपी के नेतृत्व में उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी की निगरानी में परीक्षा होगी। कमेटी की जिम्मेदारी है कि पेपर लीक न हो। फर्जी छात्र परीक्षा देने न पहुंचे, इसका भी ख्याल रखना होगा। प्रदेश के 10 सरकारी समेत 15 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 2130 व बीडीएस की 700 सीटें हैं।

सुबह 11 बजे सेंटरों में एंट्री, देरी पर बाहर

नीट यूजी का पेपर दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक होता है। इस बार छात्रों को सुबह 11 बजे सेंटरों पर पहुंचना होगा। ऐसा नहीं करने पर उन्हें परीक्षा से वंचित किया जा सकता है। अभी तक सीबीएसई के निजी स्कूलों को सेंटर बनाया जाता था, लेकिन पेपर लीक कांड के बाद व्यवस्था में बदलाव किया गया है। इस बार शासकीय स्कूल-कॉलेजों, यूटीडी, आईआईटी, एनआईटी व बड़े कॉलेजों को सेंटर बनाया जाएगा। पिछले साल दूसरे राज्यों में जो भी पेपर लीक हुए, वे सभी निजी स्कूल थे।

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