छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से 28 और 29 अक्टूबर को कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की आशंका है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को धान सहित खरीफ फसलों, सब्जियों और पशुधन की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, कुछ स्थानों पर हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे और कहीं-कहीं 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। 30 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच भी प्रदेश के विभिन्न जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को पकी हुई धान, मक्का और तिलहन फसलों की जल्द कटाई कर सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है। खेतों में जलभराव रोकने के लिए जल निकासी की व्यवस्था करें। बारिश की संभावना को देखते हुए गेहूं, चना और मसूर जैसी रबी फसलों की बुआई मौसम साफ होने तक टालने तथा नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू करने की सलाह दी गई है।
सब्जियों और बागवानी फसलों की तैयार उपज की शीघ्र तुड़ाई करने और लता वाली फसलों को सहारा देने को कहा गया है। केले के पौधों को भी सहारा दें और खेतों में पानी जमा न होने दें। मौसम साफ होने तक कीटनाशक और खरपतवारनाशक का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी गई है।
पशुपालकों को पशुओं को सूखे और सुरक्षित स्थानों पर रखने, पर्याप्त चारा व स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तथा तेज हवाओं और वज्रपात के दौरान पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचने को कहा गया है। विभाग ने किसानों से मौसम की ताजा जानकारी लेते रहने और तेज बारिश या बिजली गिरने की आशंका के दौरान खेतों में जाने से बचने की अपील की है।