रायपुर : राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी की शासी परिषद की नौवीं बैठक गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश में जलग्रहण क्षेत्र विकास से जुड़े कार्यों की समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार काम करने और जल संरक्षण के साथ ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने वाले कार्यों पर फोकस करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि जलग्रहण क्षेत्र के तहत ऐसे कामों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे अधिक से अधिक भूजल संचयन हो सके। इसके साथ ही परियोजनाओं में आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ें और लोगों की आय में भी इजाफा हो।
बैठक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत किए जा रहे पौधरोपण, अमृत सरोवर, स्टापडेम, चेकडेम सहित विभिन्न जलसंग्रहण कार्यों की समीक्षा की गई। वर्ष 2021 से अब तक हुए कार्यों और उनकी प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वाटरशेड विकास कार्यक्रम-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 के प्रारंभिक प्रतिवेदन और प्रस्तावित क्षेत्रफल के अनुमोदन को लेकर भी अधिकारियों ने विचार-विमर्श किया।
आजीविका गतिविधियों के तहत ग्रामीणों को डेयरी, मुर्गीपालन, मत्स्य पालन, बकरी और शुकर पालन, बत्तख पालन, मधुमक्खी पालन जैसे कामों से जोड़ने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा ड्रिप, स्प्रिंकलर, पंप-मोटर, अगरबत्ती उत्पादन, सब्जी उत्पादन, आटा चक्की, दाल और मसाला पिसाई मशीन जैसी गतिविधियों को भी परियोजनाओं में शामिल करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि चेकडेम, स्टापडेम, कुआं, फार्म पॉण्ड, अर्दन डेम, सिंचाई तालाब, डबरी, वृक्षारोपण और मृदा एवं नमी संरक्षण से जुड़े कार्यों का असर प्रदेश के सिंचाई रकबे पर पड़ा है। इन जलसंचयन संरचनाओं से अतिरिक्त सिंचाई क्षेत्र बढ़ा है, जिससे किसानों को फायदा मिल रहा है।
बैठक में पीसीसीएफ श्री अरुण पाण्डेय, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित वित्त, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वन विभाग, ग्रामीण आजीविका मिशन, नाबार्ड, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, केंद्रीय भूमि जल बोर्ड समेत शासी परिषद के सदस्य मौजूद रहे।