रायपुर : साइबर ठगी से बचाव और यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस के दो बड़े अभियानों को लेकर राजधानी रायपुर में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जनभागीदारी पर जोर दिया। सात सप्ताह तक चले साइबर जागृति अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और करीब 1.70 करोड़ लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। वहीं, ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 में युवाओं ने राजधानी के प्रमुख चौक-चौराहों पर जाम कम करने और यातायात को सुरक्षित बनाने के सुझाव पेश किए।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अभिनंदन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर जागरूकता अभियान खत्म नहीं हुआ है, बल्कि यह आगे की शुरुआत है। डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन ठगी के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में सिर्फ पुलिस और प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम लोगों को भी सतर्क रहना होगा।
सात सप्ताह में 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा संदेश
छत्तीसगढ़ पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक साइबर जागृति अभियान चलाया। इसके तहत स्कूल-कॉलेजों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान में डिजिटल सुरक्षा, UPI फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, नौकरी के नाम पर ठगी और डेटा गोपनीयता जैसे विषयों पर लोगों को जानकारी दी गई।
पुलिस के मुताबिक, अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम हुए और 5 लाख से ज्यादा सेल्फी के माध्यम से लोगों की भागीदारी दर्ज की गई। सोशल मीडिया पर भी अभियान का व्यापक प्रचार किया गया। 3,100 से अधिक पोस्ट को 6.02 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिले।
साइबर ठगी पर कार्रवाई से रिकवरी में सुधार का दावा
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पुलिस साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ अपराधियों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों और फर्जी सिम से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार, इन प्रयासों से साइबर अपराधों से संबंधित FIR में कमी आई है और ठगी की रकम वापस मिलने की दर में भी सुधार हुआ है।
अभियान के दौरान नागरिकों को OTP और पासवर्ड साझा नहीं करने, संदिग्ध लिंक से बचने और फर्जी निवेश योजनाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई। साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का उपयोग करने की जानकारी भी दी गई।
रायपुर के जाम वाले इलाकों के लिए युवाओं ने दिए सुझाव
समारोह में ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के प्रतिभागियों के प्रस्ताव भी चर्चा में रहे। युवाओं ने टाटीबंध चौक, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, आमापारा चौक, लोधीपारा चौक और शंकर नगर जैसे यातायात दबाव वाले क्षेत्रों का अध्ययन कर समाधान सुझाए।
हैकाथॉन के ओवरऑल विजेता कार्तिकेय पंत ने शंकर नगर टर्निंग पॉइंट के लिए सड़क की जगह का बेहतर उपयोग, स्पष्ट लेन मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते और ऑटो चालकों व स्ट्रीट वेंडरों के लिए व्यवस्थित स्थान तय करने से जुड़ा मॉडल प्रस्तुत किया। अन्य प्रतिभागियों ने पार्किंग प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन और ट्रैफिक जाम कम करने के उपाय भी बताए।
युवाओं ने AI और Internet of Things आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के प्रस्ताव भी दिए। इनमें कैमरों और AI की मदद से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान, जाम की पूर्व सूचना तथा एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर जैसी अवधारणाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपयोगी और व्यावहारिक सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
जिलों के नवाचारों को मिला सम्मान
साइबर जागृति अभियान के दौरान कई जिलों ने स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरीके अपनाए। मुंगेली में विशेष ग्राम सभाओं के जरिए करीब 15 हजार ग्रामीणों को जागरूक किया गया, जबकि गरियाबंद में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई।
दुर्ग में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से 15 हजार से अधिक लोगों तक संदेश पहुंचाया गया। जांजगीर-चांपा में ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के जरिए करीब 1.61 लाख नागरिकों को जागरूक किया गया। बिलासपुर में आकाशवाणी के विशेष फोन-इन कार्यक्रम से लगभग आठ लाख श्रोताओं तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचने की जानकारी दी गई। समारोह में बेहतर पहल करने वाले जिलों और ट्रैफिक हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर सुरक्षा और यातायात सुधार, दोनों में लोगों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपने परिवार और समाज को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने की अपील की। कार्यक्रम में विधायक राजेश मूणत, महापौर मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक अरुण गौतम, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और विद्यार्थी मौजूद रहे।