कवर्धा : कबीरधाम जिले में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत हुई है। शासकीय मेडिकल कॉलेज कवर्धा में बुधवार से नए शैक्षणिक सत्र और प्रथम बैच की पढ़ाई शुरू हो गई। पहले दिन कॉलेज पहुंचे विद्यार्थियों के गले में स्टेथोस्कोप, कंधे पर एप्रॉन और आंखों में डॉक्टर बनने का सपना नजर आया। उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा और सांसद संतोष पाण्डेय ने नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का स्वागत किया।
विद्यार्थियों को एप्रॉन, स्टेथोस्कोप, पेन और गुलाब का फूल देकर उनके नए सफर की शुरुआत कराई गई। इस दौरान छात्रों ने अतिथियों के साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी, अपनी चुनौतियों और सफलता से जुड़े अनुभव भी साझा किए।
‘डॉक्टर बनना अंतिम लक्ष्य नहीं’
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर बनना जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के बाद समाज के लिए बेहतर काम करना और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जिस परिवार और समाज ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया है, उसके प्रति सेवा की भावना बनाए रखें। पढ़ाई के दौरान अनावश्यक तनाव से बचने और लगातार मेहनत करते रहने की सलाह भी उन्होंने दी।
विद्यार्थियों से सीधे जाना, कैसे की NEET की तैयारी
कार्यक्रम के दौरान विजय शर्मा ने प्रथम बैच के विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी तैयारी और सफलता की कहानी जानी। उन्होंने छात्रों से कोचिंग, सेल्फ स्टडी, पढ़ाई की दिनचर्या और प्रवेश परीक्षा के अनुभवों के बारे में सवाल किए।
विद्यार्थियों ने बताया कि किसी ने ऑनलाइन कोचिंग के जरिए तैयारी की तो किसी ने लाइब्रेरी में स्व-अध्ययन को अपनी तैयारी का आधार बनाया। छात्रों के मुताबिक वे रोजाना करीब 8 घंटे किताबों से और 3 से 4 घंटे डिजिटल स्क्रीन के जरिए पढ़ाई करते थे। कुछ विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं के कारण 7 से 8 घंटे तक स्क्रीन पर पढ़ाई करनी पड़ती थी।
किसी ने दूसरे तो किसी ने तीसरे प्रयास में हासिल की सफलता
संवाद के दौरान राजनांदगांव की अतिथि देवांगन ने बताया कि उन्होंने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। उन्होंने अपनी सफलता में पिता के सहयोग को अहम बताया। उनके मुताबिक पिता ने गलतियों से सीखकर लगातार प्रयास करने के लिए प्रेरित किया।
भूपेंद्र सिंह ने ऑनलाइन कोचिंग से तैयारी की, जबकि कवर्धा के धरमपुरा निवासी आकाश धुर्वे ने लाइब्रेरी में सेल्फ स्टडी के जरिए प्रवेश परीक्षा की तैयारी की। भिलाई की हर्षिता तीसरे प्रयास में सफल हुईं। वहीं अंशिता सिंह के पिता ने बताया कि बेटी की तैयारी में उन्होंने मार्गदर्शन और मॉक टेस्ट में सहयोग किया।
‘डॉक्टर के पास उम्मीद लेकर आता है मरीज’
कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कठिन मेहनत के बाद मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना उपलब्धि है, लेकिन यह सफर की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति डॉक्टर के पास जाता है तो उसके मन में स्वस्थ होने की उम्मीद होती है। ऐसे में चिकित्सा के क्षेत्र में ज्ञान के साथ संवेदनशीलता और सेवा भाव भी जरूरी है।
सांसद संतोष पाण्डेय ने भी प्रथम बैच के विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से कवर्धा में मेडिकल कॉलेज के पहले बैच की पढ़ाई शुरू हो सकी है।
कार्यक्रम में राजेन्द्र चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, मेडिकल कॉलेज की अधिष्ठाता डॉ. प्रतिभा जैन शाह, सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र तूरे सहित जनप्रतिनिधि और चिकित्सक मौजूद रहे।