रायपुर, विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व 2026 में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को आमंत्रण मिला है। बस्तर सांसद महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति, जगदलपुर के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार शाम मुख्यमंत्री निवास में उनसे मुलाकात कर पर्व में शामिल होने का न्योता दिया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक पागा पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री साय ने आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार जताते हुए बस्तर दशहरा के सफल आयोजन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी आस्था, जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता की अनूठी विरासत है। इसमें बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता की झलक दिखाई देती है।

75 दिनों तक चलती है अनूठी परंपरा

बस्तर दशहरा करीब 75 दिनों तक चलने वाला सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। इसकी शुरुआत हरेली अमावस्या से होती है और विभिन्न पूजा-विधानों के बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तक आयोजन चलता है। इस वर्ष 12 अगस्त को पाटजात्रा पूजा के साथ पर्व की शुरुआत हुई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा, 18 अक्टूबर को बेल पूजा और 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन होगा। पर्व से जुड़े अलग-अलग अनुष्ठानों में बस्तर के विभिन्न समुदायों की परंपरागत भागीदारी रहती है।

भगवान राम नहीं, मां दंतेश्वरी की आराधना केंद्र में

बस्तर दशहरा की सबसे खास बात यह है कि इसे भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उत्सव के तौर पर नहीं, बल्कि बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की आराधना के पर्व के रूप में मनाया जाता है। यही विशिष्ट परंपरा इसे देश के अन्य दशहरा आयोजनों से अलग पहचान देती है। बस्तर दशहरा की परंपरा को ऐतिहासिक रूप से चालुक्य नरेश पुरुषोत्तम देव से भी जोड़ा जाता है। इसी परंपरा के कारण पर्व में रथ का विशेष महत्व है। मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन सहित विभिन्न समुदायों की जिम्मेदारियां आयोजन में पारंपरिक रूप से तय रहती हैं। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर रथ निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी होती है।

देश-दुनिया से पहुंचते हैं पर्यटक

भव्य रथयात्रा, विशिष्ट पूजा-अनुष्ठान, जनजातीय परंपराएं और लोक संस्कृति बस्तर दशहरा को देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनाती हैं। यह पर्व बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ क्षेत्र के पर्यटन को भी पहचान देता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की संस्कृति छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर है। बस्तर दशहरा जैसी परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती हैं। इन परंपराओं का संरक्षण और उन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाना सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री को आमंत्रित करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में बस्तर सांसद महेश कश्यप सहित मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन और बस्तर दशहरा समिति के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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