रायपुर, छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के प्राकृतिक वनोपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। दंतेवाड़ा जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड को राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत वनोपज के लिए जैविक प्रमाणन मिला है। इसके साथ ही यह प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वनोपज के लिए यह प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बन गई है। इस उपलब्धि से स्थानीय महिलाओं के लिए बेहतर बाजार और आजीविका के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर कंपनी से जुड़ी महिलाओं और बिहान मिशन की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्थानीय संसाधनों, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को केंद्र में रखकर बस्तर के विकास को आगे बढ़ा रही है। एनपीओपी प्रमाणन से क्षेत्र की महिलाओं के पारंपरिक ज्ञान और मेहनत को नई पहचान मिलेगी। साथ ही प्रमाणित वनोपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने, बेहतर मूल्य प्राप्त करने और प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं विपणन जैसी गतिविधियों के माध्यम से रोजगार बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
वर्ष 2023 में गठित माँ दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी से वर्तमान में 1,080 महिला शेयरधारक जुड़ी हैं। इसके अलावा 60 उत्पादक समूहों की लगभग 2,100 वनोपज संग्राहक महिलाएं भी कंपनी की गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं। कंपनी पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुकी है। पिछले वर्ष लगभग 54 लाख रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई थी, जबकि चालू वर्ष में अब तक 50 लाख रुपये से अधिक के वनोपज की खरीदी की जा चुकी है। जैविक प्रमाणन के बाद कंपनी को अपने उत्पादों के बेहतर मूल्य और व्यापक बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है।
स्थानीय उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए कंपनी ने ‘दण्डक ब्रांड’ की शुरुआत की है। इसी कड़ी में दंतेवाड़ा में विशेष बिक्री केंद्र भी शुरू किया गया है, जहां स्थानीय खाद्य पदार्थों और वनोपज को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इस ब्रांड के अंतर्गत नीम फूल, एचएमटी चावल, लाल चूड़ी चावल, बासमती चावल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी सहित कई उत्पादों को बाजार में उतारा गया है। उत्पादों के मूल्य संवर्धन और आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से उनकी बाजार में पहुंच बढ़ाने की तैयारी है। कंपनी इन उत्पादों को राज्य और देश के बाजारों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की संभावनाएं भी तलाश रही है।
कंपनी की अध्यक्ष विमला ठाकुर ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए बताया कि पहले महिलाओं द्वारा संग्रहित वनोपज की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों में होती थी, जहां कई बार अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता था। उन्होंने कहा कि दण्डक ब्रांड और एनपीओपी प्रमाणन से महिलाओं में नया उत्साह आया है। अब उनके उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचने और बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है, जिससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रमाणित उत्पादों के विपणन के साथ कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) तथा संबंधित एजेंसियों के सहयोग से निर्यात की संभावनाएं भी तलाशी जा सकेंगी।
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के नेतृत्व में जिला प्रशासन की इस पहल को बस्तर में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जैविक प्रमाणन, स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और दण्डक ब्रांड के माध्यम से विपणन से वनोपज संग्राहकों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं। इससे न केवल पारंपरिक उत्पादों को व्यापक पहचान मिलेगी, बल्कि महिलाओं और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।