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Balanced fertilizer use India

कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो के निर्देशन में कार्यालय उप संचालक कृषि, जिला सक्ती के सभाकक्ष में संतुलित उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु प्रशिक्षण सह समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण के दौरान अनुविभागीय कृषि अधिकारी एवं सहायक मृदा परीक्षण अधिकारी, सक्ती द्वारा हरी खाद के उपयोग, नील हरित काई के निर्माण तथा इसके उपयोग की विधियों पर विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि इन उपायों के अपनाने से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है, जिससे फसल की लागत घटती है और दीर्घकालिक मृदा उर्वरता एवं स्थिरता में सुधार होता है। जिले के किसानों से अपील की गई है कि जिनके पास सुनिश्चित सिंचाई सुविधा है, वे आगामी मानसून से पूर्व धान की रोपाई के 40-45 दिन पहले हरी खाद वाली फसलों जैसे सनई एवं ढेंचा की बुआई के लिए योजना तैयार करें। साथ ही किसानों को जागरूक करने, उनकी क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को इस दिशा में प्रेरित करने के निर्देश दिए गए। उप संचालक कृषि, जिला सक्ती ने सभी मैदानी अमले को निर्देशित किया कि खरीफ वर्ष 2026 के लिए संतुलित उर्वरकों के उपयोग को लेकर ग्राम स्तर एवं समितियों में चौपाल के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक किसान का फार्मर आईडी बनाने हेतु विशेष अभियान चलाने और पात्र किसानों का पीएम किसान सम्मान निधि योजना में पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। कार्यक्रम के अंतर्गत शासकीय कृषि बीज प्रगुणन प्रक्षेत्र रगजा में नील हरित काई उत्पादन तकनीक का जीवंत प्रदर्शन भी कराया गया, जिससे अधिकारियों को व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम मे जिले के चारों विकासखंड सक्ती, मालखरौदा, जैजैपुर एवं डभरा के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे

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