रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 26 वर्ष पूरे कर चुका है। 1 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आए इस प्रदेश ने अपनी विकास यात्रा में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से पहचान बनाने वाले छत्तीसगढ़ ने इन वर्षों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और परिवहन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य गठन के बाद आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन ने प्रदेश के विकास को नई दिशा दी है।
सड़क और परिवहन के क्षेत्र में हुए विस्तार ने प्रदेश के दूरस्थ इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों के निर्माण से गांवों और शहरों के बीच संपर्क बेहतर हुआ है। रायपुर-विशाखापट्टनम और रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारे जैसी परियोजनाओं से प्रदेश में व्यापार, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। वहीं, रेल नेटवर्क के विस्तार के तहत दल्लीराजहरा-रावघाट रेल लाइन और ताड़ोकी-रावघाट तथा अभनपुर-कुरूद रेलखंडों की शुरुआत महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। रावघाट तक रेल पहुंचना बस्तर के लिए ऐतिहासिक कदम है, जिससे क्षेत्र में आवागमन के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के नए अवसर विकसित होंगे।
जनजातीय समुदायों का विकास भी छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। बस्तर के दूरस्थ और माओवादी प्रभावित गांवों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने के लिए संचालित नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दूरस्थ गांवों तक शासन की योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। इसी तरह प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवारों को पक्के आवास, पेयजल, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
जनजातीय बहुल गांवों के समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस अभियान के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही वन अधिकारों का संरक्षण, लघु वनोपज का संग्रहण और मूल्य संवर्धन, महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने जैसे प्रयासों से जनजातीय परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
कृषि, सिंचाई, खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रदेश लगातार आगे बढ़ने के प्रयास कर रहा है। औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नई औद्योगिक नीति 2024-30 लागू की गई है। इसके माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित करने, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और कौशल विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इन पहलों से छत्तीसगढ़ को एक मजबूत और रोजगारोन्मुख अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
राज्य स्थापना के 26 वर्ष पूरे होने के साथ छत्तीसगढ़ अब विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग, जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण, आधुनिक आधारभूत संरचना का विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। विकास की अब तक की यात्रा प्रदेश की उपलब्धियों को दर्शाती है, वहीं आने वाले वर्षों में नए अवसरों और संभावनाओं के साथ छत्तीसगढ़ को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प भी मजबूत करती है।