छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में किसानों और भू-स्वामियों को लंबे समय से नामांतरण, सीमांकन, फसल बीमा, कृषि ऋण और भूमि संबंधी अन्य कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इन प्रक्रियाओं में समय लगने के साथ बिचौलियों के हस्तक्षेप, अतिरिक्त खर्च और भूमि सीमाओं को लेकर विवाद जैसी समस्याएं भी सामने आती थीं।
इन्हीं चुनौतियों को कम करने के उद्देश्य से ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रशासनिक सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने की पहल की गई है। अभियान के माध्यम से राजस्व विभाग का अमला आधुनिक तकनीक, जीपीएस उपकरणों और प्रशिक्षित सर्वेयरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर भूमि संबंधी कार्यों को आसान बनाने में जुटा है।
डिजिटल सर्वे से बदली राजस्व व्यवस्था
अभियान के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों के कुल 20,551 राजस्व ग्रामों में से 19,805 गांवों यानी लगभग 96.37 प्रतिशत गांवों में डिजिटल सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है।
रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती और सूरजपुर सहित कई जिलों में डिजिटल सर्वे का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया है। वहीं बस्तर संभाग के दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों में भी ड्रोन कैमरों और हाई-प्रिसिजन जीपीएस तकनीक के माध्यम से शेष गांवों का डिजिटल सर्वेक्षण जारी है।
किसानों और भू-स्वामियों को मिल रहा लाभ
डिजिटल नक्शों और सटीक सीमांकन से भूमि संबंधी रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिल रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की सीमाओं से जुड़े विवादों के समाधान में भी सुविधा हो रही है।
अद्यतन डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से किसानों के लिए बैंकिंग और कृषि ऋण से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं किसान न्याय योजना, आपदा राहत और फसल बीमा जैसी योजनाओं के लाभ को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने में भी डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी साबित हो रहे हैं।
तकनीक के साथ गांवों तक पहुंच रहा प्रशासन
‘सेवा संकल्प अभियान’ का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को लोगों के करीब लाना है। इसके तहत किसानों और भू-स्वामियों को भूमि संबंधी कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा जा रहा है।
डिजिटल सर्वेक्षण और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से राजस्व रिकॉर्ड को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों के समय और संसाधनों की बचत के साथ प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संपर्क भी मजबूत हो रहा है।