रायपुर, जशपुर जिले के ग्राम घोलेंग में पारंपरिक हस्तकरघा हुनर अब महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का जरिया बन रहा है। आजीविका परिसर में टेक्सटाइल और हैंडलूम का प्रशिक्षण देकर स्थानीय कौशल को आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
आदित्य बिरला ग्रुप, जिला प्रशासन, बिहान और टेक्सटाइल स्किल सेक्टर काउंसिल के सहयोग से चल रहे इस प्रशिक्षण में करीब 35 से 40 परिवारों और स्व सहायता समूहों की महिलाओं को हैंडलूम और टेक्सटाइल से जुड़े काम सिखाए जा रहे हैं। महिलाएं आधुनिक मशीनों के जरिए कपड़ा, शॉल, साड़ी और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण ले रही हैं।
हुनर के साथ उत्पादन का मौका
घोलेंग में प्रशिक्षण को सिर्फ कौशल सीखने तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रशिक्षण के साथ उत्पादन गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि महिलाएं सीखे हुए हुनर को वास्तविक काम से जोड़ सकें। डिजाइन, गुणवत्ता और बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने की जानकारी भी दी जा रही है।
इस पहल से जशपुर की पारंपरिक हस्तकरघा कला को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। महिला स्व सहायता समूहों के जरिए उत्पादन बढ़ाने और भविष्य में बाजार से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
टेक्सटाइल प्रशिक्षण से स्थानीय युवाओं को भी रोजगारपरक कौशल मिल रहा है। अपने क्षेत्र में ही काम और स्वरोजगार के अवसर मिलने से युवाओं के लिए नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं।
घोलेंग की यह पहल परंपरा और तकनीक को जोड़कर ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। महिलाओं और युवाओं के हाथों में हुनर के साथ अब उसे आय में बदलने का अवसर भी तैयार हो रहा है।