बीजापुर : शिक्षा की मुख्यधारा से दूर हो चुके बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए बीजापुर जिले में विशेष अभियान शुरू किया गया है। नक्सल प्रभावित और सुदूर क्षेत्रों के करीब 1200 शाला त्यागी (ड्रॉपआउट) और अप्रवेशी बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने की पहल की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार स्कूल शिक्षा विभाग ने यह विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की पहचान कर उन्हें आवासीय पोर्टा केबिनों में प्रवेश दिलाया गया है।
खेल-गतिविधियों से बच्चों को स्कूल माहौल से जोड़ा जा रहा
लंबे समय से पढ़ाई से दूर रहे बच्चों को स्कूल के वातावरण में सहज बनाने के लिए शुरुआत में खेलकूद, चित्रकला, नृत्य, टीवी कार्यक्रम और शैक्षणिक भ्रमण जैसी गतिविधियां कराई जा रही हैं। इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
90 दिन का चलेगा ब्रिज कोर्स
बच्चों की शैक्षणिक क्षमता का आकलन करने और उनकी बुनियादी भाषा एवं गणित की समझ मजबूत करने के लिए 90 दिनों का विशेष ब्रिज कोर्स संचालित किया जा रहा है।
इस दौरान बच्चों के सीखने के स्तर को समझकर उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहयोग दिया जाएगा, ताकि वे नियमित शिक्षा व्यवस्था में आसानी से शामिल हो सकें।
मूल्यांकन के बाद मिलेगा नियमित कक्षा में प्रवेश
ब्रिज कोर्स पूरा होने के बाद बच्चों का मूल्यांकन किया जाएगा। परीक्षा के परिणाम के आधार पर बच्चों की क्षमता के अनुसार उन्हें उपयुक्त कक्षा में नियमित प्रवेश दिया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि लंबे समय बाद इतनी बड़ी संख्या में बच्चे दोबारा शिक्षा से जुड़ रहे हैं। बच्चों की देखभाल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।
उपस्थिति और शिक्षा की गुणवत्ता पर रहेगा फोकस
जिला पंचायत बीजापुर के सीईओ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अध्यापन की गुणवत्ता, भोजन व्यवस्था और बच्चों के सहज समायोजन पर विशेष ध्यान देने को कहा है।
प्रशासन का उद्देश्य है कि ये बच्चे दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर भविष्य की ओर आगे बढ़ सकें।