सूर्यदेव फरवरी के पहले सप्ताह में मार्च-अप्रैल जैसे तेवर दिखाने लगा है। चूभती धूप से बचने के लिए लोग छाया की तलाश करते रहे। सूर्य की तेज सबसे अधिक सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक रहती है। इससे वातावरण गर्म हो रहा है।

लोगों का कहना है कि इस बार ठंड वैसे नहीं पड़ी है, जैसा की पड़नी चाहिए। रूक-रूक पड़ रही ठंड से मौसम सुहावना रहा। ठंड की शुरूआत अक्टूबर में हुई। यह ठंड जनवरी के दूसरे पखवाड़ के बाद गायब हो गई। तापमान में दिन-ब-दिन इजाफा दर्ज किया गया। फरवरी माह शुरू होते ही सूर्य की तेज किरणों की वजह से लोगाें को गर्मी का अहसास होने लगा है। मानों जैसे मार्च और अप्रैल में तेज धूप पड़ती है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के तापमान में इजाफा अनुमान लगाया है। इससे गर्मी और बढ़ेगी। इस बार गर्मी लोगों को खूब परेशान करेगी।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान

मौसम विभाग की माने तो अभी से सूर्योदय के साथ ही तापमान तेज हो रही है। 24 घंटे में से दिन का लगभग पांच से छह घंटे का 30 डिग्री से अधिक दर्ज की गई है। इसकी वजह से मौसम विभाग ने सुबह लगभग 10.30 बजे अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री दर्ज किया गया है। हालांकि रात में अब भी हल्की ठंडकता बरकरार है। इस कारण न्यनूतम तापमान में तेजी से बढ़ोतरी नहीं हो रही है। न्यनूतम पारा 17.8 डिग्री दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दो से तीन दिनों के भीतर अधिकतम तापमान में इजाफा होने की उम्मीद जताई है।

तापमान में 16.8 डिग्री का अंतर

मौसम विभाग के दर्ज पारा के अनुसार अधिकतम और न्यनूतम तापमान में लगभग 16.8 डिग्री का अंतर दर्ज किया है। दिन में मौसम गर्म हो रहा है, तो वहीं रात में हल्की ठंड जारी है। ठंड और गर्म का असर लोगाें के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इससे लोगों को सर्दी, खांसी और जुकाम हो रही है। मौसम में बदलाव का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इससे लोग परेशान हैं। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है।

सजने लगा इलेक्ट्रॉक्सि मशीन और खस का बाजार

इधर गर्मी का सीजन दस्तक देने के साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स मशीनों के व्यापारियों ने कूलर, पंखा, एसी के नए सामान मंगा चुके हैं। दुकानों इन मशीनों से सज चुकी है। लोग अभी से गर्मी के सीजन में ठंड से बचने के लिए पंखा, कूलर, एसी, फ्रिज सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स मशीनों की खरीदी के लिए पहुंचने लगे हैं। इसके अलावा लोगाें ने पंखा और कूलर की सफाई शुरू कर दी है। इसी के साथ लोगों में खस की मांग बढ़ गई है।

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