पश्चिमी विक्षोभ और बादल का प्रभाव समाप्त होने के साथ ही उत्तर दिशा से आ रही हिमालयी बर्फीली हवाओं के प्रभाव से सरगुजा में पिछले दो दिन के भीतर 5.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ आज न्यूनतम तापमान 6.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से मशहूर सरगुजा के प्रमुख पर्यटन केंद्र मैनपाट में बुधवार को पारा 3 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने के साथ ही ओस की बूंदे जम गई और जमकर पाला पड़ा.

न्यूनतम तापमान में और गिरावट
मध्य छत्तीसगढ़ में रायपुर, दुर्ग में दो दिनों में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है. माना में न्यूनतम तापमान 10.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विशेषज्ञ एच. पी. चंद्रा ने लोकल 18 को बताया कि रायपुर समेत प्रदेश में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना है. विशेषज्ञ का कहना है कि लगभग 10 साल बाद माना में दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में पारा 11 डिग्री के नीचे गया है. बीती रात को रायपुर में 13.2 डिग्री सेल्सियस और दुर्ग में न्यूनतम तापमान 9.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मैनपाट में धान पैरा, घास के साथ ही पत्तों में पड़ी ओस की बूंदे जम गई. न सिर्फ पहाड़ी, बल्कि मैदानी इलाकों में भी शीत लहर के स्थिति के साथ लोग गर्म कपड़ों से लदे रहे.

सोनहत में गिरा तापमान, तो जमने लगा पाला
कोरिया जिले में लगातार तापमान गिरने से वनांचल क्षेत्र सोनहत में पाला जम गया. जगह-जगह पर पाला जमा होने से सफेद चादर सा दिख रहा था. गत दिवस अचानक हुए रिमझिम बारिश के कारण ठंड में इजाफा देखने को मिला. बादल होने के कारण कम ठंड लग रही थी, लेकिन बादल के छटने से एकाएक ठंड में बढ़ोत्तरी देखने को मिली.

मौसम विशेषज्ञ एचपी चंद्रा ने Local 18 को आगे बताया कि नवंबर माह में विक्षोभ की अनुपस्थिति के कारण लंबे समय के बाद इस वर्ष लगातार उत्तरी हवा का प्रवाह दिख रहा था, जिससे नवंबर माह में शीत लहर की स्थिति बनी थी. वहीं खाड़ी में हुई हलचल और उत्तर भारत में पछुआ की सक्रिता के कारण उत्तरी शुष्क हवा के बाधित होने से तापमान में बढ़ोतरी हुई थी, मगर विक्षोभ के कमजोर पड़ने के साथ ही उत्तरी हवाओं का पुनः प्रवेश होने से तापमान में गिरावट आने के साथ ठंड बढ़ी है.

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