उत्तर बस्तर कांकेर के भानुप्रतापपुर क्षेत्र के ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित पुनर्वास केंद्र में रक्षाबंधन पर बदलाव की भावुक तस्वीर देखने को मिली। आत्मसमर्पित माओवादियों ने जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के जवानों की कलाई पर राखी बांधकर शांति, विश्वास और भाईचारे का संदेश दिया।
आत्मसमर्पित माओवादी शांति कवाची ने बताया कि वह पहली बार रक्षाबंधन का पर्व मना रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण के तहत राखी बनाना सीखा और अपने हाथों से तैयार राखी DRG जवानों की कलाई पर बांधी। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने का एहसास हो रहा है।
उन्होंने बताया कि पुनर्वास केंद्र में उन्हें सिलाई, काष्ठ शिल्प और राखी निर्माण सहित विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन हुनरों के जरिए वे सम्मानजनक आजीविका हासिल कर परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
वहीं DRG जवान टेकेश्वर हिचामी ने कहा कि पहले परिस्थितियां ऐसी थीं कि दोनों पक्ष बंदूक लेकर आमने-सामने रहते थे। आज उन्हीं हाथों में राखी का पवित्र धागा है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद भावुक और अलग अनुभव है।
बंदूक से हुनर तक बदलाव
रक्षाबंधन का यह आयोजन केवल एक पर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुनर्वास और मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया की तस्वीर भी सामने आई। आत्मसमर्पित माओवादी अब हथियारों की जगह कौशल और मेहनत के जरिए अपने भविष्य को संवारने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
कल तक आमने-सामने थे, आज एक-दूसरे की कलाई पर विश्वास का धागा है।