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“घर से शुरू किया पापड़ का काम, आज बन गईं पूरे गांव की प्रेरणा! जानिए विद्यावती चौधरी की कहानी”

ByThepublic

Jun 23, 2026 #Bihan Scheme, #Bihan Yojana, #Business Success Story, #cg news, #chhattisgarh news, #Chhattisgarh Women, #Empowering Women, #Financial Independence, #Home Business Idea, #inspirational story, #Lakhpati Didi, #Lakhpati Didi Yojana, #motivational story, #National Rural Livelihood Mission, #NRLM, #Papad Business, #Rice Papad Business, #rural development, #Rural India, #Rural Startup, #rural women entrepreneurship, #rural women success, #self employment, #self help group, #SHG Business, #SHG Success Story, #Small Business Idea, #Startup Story, #success story India, #village success story, #Women Business, #women empowerment, #Women empowerment India, #Women Entrepreneur, #Women Self Employment, #Women Startup India, #आत्मनिर्भर महिला, #गांव की महिला, #ग्रामीण महिला, #ग्रामीण विकास, #चावल पापड़, #छत्तीसगढ़ न्यूज़, #पापड़ व्यवसाय, #प्रेरणादायक कहानी, #बिहान योजना, #महिला आत्मनिर्भरता, #महिला उद्यमी, #महिला रोजगार, #महिला सफलता की कहानी, #महिला सशक्तिकरण, #लखपति दीदी, #सफलता की कहानी, #स्व सहायता समूह, #स्वयं सहायता समूह
Self Help Group Success Story

जिले के ग्राम पंचायत ननकट्ठी की श्रीमती विद्यावती चौधरी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि गांव की अनेक महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखाया। आराध्या स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष एवं एफएलसीआरपी के रूप में कार्यरत विद्यावती चौधरी ने समूह की बचत एवं ऋण राशि का उपयोग करते हुए चावल पापड़ निर्माण और सिलाई केंद्र की शुरुआत की। प्रारंभ में यह कार्य छोटे स्तर पर शुरू हुआ, जहां समूह की महिलाएं घर-आंगन में मिलकर पापड़ तैयार करती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद महिलाओं ने मेहनत, लगन और गुणवत्ता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
प्रतिदिन महिलाएं एकत्रित होकर चावल पापड़ तैयार करती हैं। सामूहिक श्रम और बेहतर गुणवत्ता के कारण उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई। धीरे-धीरे उनका छोटा प्रयास एक सफल उद्यम में बदल गया। आज समूह द्वारा तैयार किए गए पापड़ स्थानीय बाजारों में अपनी पहचान बना चुके हैं और प्रतिमाह हजारों रुपये का कारोबार हो रहा है। इस उद्यम ने समूह की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। नियमित आय मिलने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों की पूर्ति अब अधिक आसानी से हो रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हुई हैं। विद्यावती चौधरी की सफलता केवल आर्थिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे सामूहिक प्रयासों से बड़े बदलाव ला सकती हैं। आज ननकट्ठी की महिलाएं अपने उत्पादों के साथ गर्व से खड़ी हैं और गांव में महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बन चुकी हैं। ग्राम ननकट्ठी की स्व सहायता समूह, सामूहिक मेहनत और बिहान के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर लखपति दीदी बनने का सपना साकार कर रही हैं।

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