शक्तिपीठ परियोजना के तहत विकसित होगा धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर, श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएंरायपुर। छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने के लिए राज्य सरकार पांच प्रमुख शक्तिपीठों को विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी, सूरजपुर के कुदरगढ़ धाम की मां बागेश्वरी और चंद्रपुर की मां चंद्रहासिनी को धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की योजना है। लगभग 1,000 किलोमीटर लंबे आध्यात्मिक पर्यटन कॉरिडोर की परिकल्पना के साथ इन तीर्थस्थलों तक पहुंच आसान बनाने और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक विरासत और समृद्ध धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां के मंदिरों और तीर्थस्थलों में सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग और विश्राम सुविधाओं से जोड़ना है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
पांच शक्तिपीठों के भ्रमण की योजना
राज्य सरकार छत्तीसगढ़ आस्था पथ योजना के तहत पांचों प्रमुख शक्तिपीठों के भ्रमण और दर्शन की व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए पांच करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक ही धार्मिक यात्रा के अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जा रही है।
परियोजना के अंतर्गत मंदिर परिसरों का सौंदर्यीकरण, श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल, बेहतर पहुंच मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक परिवेश को संरक्षित रखते हुए पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने की योजना है।
मां महामाया मंदिर के विकास के लिए 200 करोड़ की कार्ययोजना
बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार की तीर्थस्थल कायाकल्प एवं आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान (प्रसाद) योजना के अंतर्गत 200 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार कर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय को भेजी गई है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद संबंधित एजेंसी का चयन कर विकास कार्य शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। वहीं, डोंगरगढ़, कुदरगढ़, चंद्रपुर और दंतेवाड़ा स्थित शक्तिपीठों के विकास के लिए भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
इन धार्मिक स्थलों पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की जरूरतों के अनुरूप आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इससे मंदिरों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के साथ पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
श्रद्धालुओं को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
शक्तिपीठों के विकास के तहत मंदिर परिसरों में उद्यान, प्रकाश व्यवस्था, हवन-पूजन स्थल, रेलिंग, पेयजल, सामुदायिक शौचालय और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। इसके अलावा सुव्यवस्थित पार्किंग, पर्यटक सहायता केंद्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, प्राथमिक चिकित्सा, सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की योजना है।
स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ठहरने की सुविधाएं, होम स्टे और अन्य पर्यटन सुविधाओं को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित मंदिरों तक पहुंच आसान बनाने के लिए आवश्यक संपर्क सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा। रोप-वे जैसी सुविधाओं का विकास संबंधित स्थल की जरूरत, तकनीकी व्यवहार्यता और स्वीकृति के आधार पर किया जा सकेगा।
मां बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़
राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़ी प्राचीन मान्यताएं और धार्मिक परंपराएं इसे विशेष पहचान प्रदान करती हैं।
डोंगरगढ़ की पहाड़ियों और आसपास के प्राकृतिक परिवेश के बीच स्थित यह मंदिर धार्मिक पर्यटन के साथ क्षेत्रीय संस्कृति का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। शक्तिपीठ परियोजना के तहत बेहतर पहुंच, श्रद्धालुओं की सुविधा और परिसर के व्यवस्थित विकास से यहां आने वाले यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
मां महामाया मंदिर, रतनपुर
बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्थित मां महामाया मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मंदिर का संबंध कलचुरी कालीन इतिहास से जोड़ा जाता है। यहां मां महामाया की आराधना के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। रतनपुर का ऐतिहासिक महत्व और मंदिर की धार्मिक प्रतिष्ठा इसे प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों में स्थान दिलाती है।
मंदिर के समग्र विकास के लिए तैयार की गई 200 करोड़ रुपये की कार्ययोजना इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने पर मंदिर परिसर और उससे जुड़ी सुविधाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
मां दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा
बस्तर अंचल के दंतेवाड़ा में स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। मंदिर का संबंध बस्तर की जनजातीय परंपराओं और स्थानीय आस्था से गहराई से जुड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता सती का दांत गिरा था, इसी कारण देवी का नाम दंतेश्वरी पड़ा।
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के दौरान मंदिर का विशेष महत्व रहता है। इस पर्व में देवी की परंपराओं और जनजातीय संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मंदिर के विकास से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान दिलाने में मदद मिल सकती है।
मां बागेश्वरी मंदिर, कुदरगढ़ धाम
सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड में स्थित कुदरगढ़ धाम पहाड़ी और वन क्षेत्र के बीच बसा प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां मां बागेश्वरी की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताएं और परंपराएं इस क्षेत्र की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित मार्ग, पेयजल, स्वच्छता और विश्राम की बेहतर व्यवस्था विशेष महत्व रखती है। योजनाबद्ध विकास से धार्मिक यात्रा को सुविधाजनक बनाने और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावना है।
मां चंद्रहासिनी मंदिर, चंद्रपुर
सक्ती जिले के चंद्रपुर में महानदी के तट के निकट स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर प्रदेश के प्रसिद्ध देवी तीर्थस्थलों में शामिल है। महानदी और मांड नदी के संगम क्षेत्र के निकट स्थित इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की धार्मिक मान्यताएं और आसपास का प्राकृतिक परिवेश इसे विशेष आकर्षण प्रदान करते हैं।
शक्तिपीठ परियोजना के तहत यहां श्रद्धालुओं के लिए पहुंच मार्ग, पेयजल, स्वच्छता, बैठने और विश्राम की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा सकता है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ क्षेत्र की स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
शक्तिपीठ परियोजना का उद्देश्य केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण करना नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं और गतिविधियों को व्यापक रूप से विकसित करना भी है। बेहतर सड़क संपर्क, ठहरने की व्यवस्था, स्थानीय परिवहन, खानपान और होम स्टे जैसी सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए पर्यटन सुविधाओं का विकास राज्य को प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में सहायक हो सकता है। इसके साथ स्थानीय समुदायों की परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान देना भी आवश्यक होगा।
पांच प्रमुख शक्तिपीठों को एक धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित करने की पहल से प्रदेश की आस्था, इतिहास और संस्कृति को एक साथ जोड़ने का अवसर मिलेगा। बेहतर आधारभूत सुविधाओं और सुव्यवस्थित पर्यटन प्रबंधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने तथा स्थानीय विकास को गति देने की उम्मीद है।