रायपुर : घुमड़ते बादलों, सावन की फुहारों और सुर-ताल की मनोहारी संगति के बीच रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर ‘पावस प्रसंग’ का भव्य सांस्कृतिक आयोजन हुआ। कथक नृत्य और शास्त्रीय संगीत की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने वर्षा ऋतु के सौंदर्य और संवेदनाओं को जीवंत कर दिया।
कथक में दिखी सावन की उमंग
कार्यक्रम में शाश्वती बैनर्जी ने कथक की प्रस्तुति के माध्यम से सावन की उमंग, बादलों की गरज और बारिश की रिमझिम को नृत्य मुद्राओं में साकार किया। भाव, लय और ताल के सुंदर समन्वय ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया।
वहीं इशिका गिरी ने भी कथक की मनोहारी प्रस्तुति दी। उनके नृत्य में वर्षा ऋतु के उल्लास और सौंदर्य का प्रभावी चित्रण देखने को मिला।
शास्त्रीय सुरों से सुरमयी हुआ माहौल
शास्त्रीय गायिका मेघा बोस ने अपनी सुमधुर प्रस्तुति से पावस ऋतु की कोमल अनुभूतियों को स्वर दिए। इसके साथ ही मेवाती घराने के शास्त्रीय गायक प्रदीप कुमार चौबे ने अपनी गायकी से वातावरण को सुरमयी बना दिया।
मुक्ताकाशी मंच पर खुले आसमान के नीचे शास्त्रीय संगीत और कथक की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को खास बना दिया। बारिश के मौसम और कला के इस संगम का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।
कलाकारों का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान साहित्य परिषद के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने प्रतिभागी कलाकारों को सम्मानित किया। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय शास्त्रीय कलाएं हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे आयोजन कलाकारों को मंच देने के साथ नई पीढ़ी को कला और संस्कृति से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के संचालक डॉ. संजय कनौजे ने भी कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और कला के क्षेत्र में कलाकारों को निरंतर प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कला प्रेमियों से सजा मुक्ताकाशी मंच
कार्यक्रम में उप संचालक उमेश मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार एवं फोटोग्राफर दीपेंद्र दीवान, उदयभान सिंह सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, श्रोता और दर्शक मौजूद रहे।
‘पावस प्रसंग’ की शाम प्रकृति और कला के खूबसूरत संगम की गवाह बनी। एक ओर आसमान में घुमड़ते बादल और सावन की फुहारें थीं, तो दूसरी ओर कथक की लय, घुंघरुओं की झंकार और शास्त्रीय गायन के मधुर सुर। इस संगम ने पावस ऋतु को महज मौसम नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक अनुभूति में बदल दिया।