जगदलपुर, बस्तर के जगदलपुर में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘सहकार से समृद्धि’ वर्कशॉप का शुभारंभ हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आयोजित यह नौवां राष्ट्रीय सम्मेलन है। बस्तर में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्रालय की ओर से इस स्तर का राष्ट्रीय विचार-मंथन आयोजित किया जा रहा है। वर्कशॉप का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन के माध्यम से दूरदराज, आकांक्षी और जनजातीय क्षेत्रों में विकास और आर्थिक समृद्धि का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारिता की सार्थकता तभी है, जब इसका लाभ जमीनी स्तर पर समाज के अंतिम छोर तक पहुंचे। उन्होंने प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए देशभर में दो लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स स्थापित करने, उनका पूर्ण डिजिटलीकरण करने और उन्हें कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना को तेजी से लागू करने के साथ पैक्स के विविधीकरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे नए क्षेत्रों में अवसर तलाशने और सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाने की जरूरत बताई।
छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारिता को केवल खाद और ऋण वितरण तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विविधीकरण, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों का गठन किया जा चुका है। डेयरी, मत्स्य पालन और लघु वनोपज के क्षेत्र में भी सहकारिता आधारित गतिविधियों को बढ़ाया जा रहा है। समितियों को डिजिटल सुविधाओं, माइक्रो-एटीएम और सीएससी से जोड़कर ग्रामीण आबादी को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने छत्तीसगढ़ में सहकारिता आधारित औद्योगिक गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कोंडागांव के मक्का आधारित और कवर्धा के गन्ना आधारित एथेनॉल संयंत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है। सम्मेलन में तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता पी. अमुधा ने भी अपने राज्य के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु ने सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए एक, तीन और पांच वर्षीय विजन डॉक्यूमेंट तथा विस्तृत एक्शन प्लान तैयार किया है। प्राथमिक समितियों के उत्पादों को बेहतर और प्रतिस्पर्धी बाजार उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समन्वय किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बस्तर में सम्मेलन के आयोजन की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ समय पहले क्षेत्र में भारी जलभराव की स्थिति बनी थी और सम्मेलन स्थल भी कई दिनों तक प्रभावित रहा। इसके बावजूद जिला प्रशासन और आयोजन से जुड़ी टीम ने चुनौती को स्वीकार करते हुए कम समय में परिसर को राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के लिए तैयार किया। उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सहकारिता के क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं से स्थानीय आजीविका को नई दिशा मिल सकती है। सम्मेलन की शुरुआत में देश में सहकारिता क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। आयोजन स्थल पर विभिन्न सहकारी समितियों और संस्थाओं ने अपने उत्पादों के स्टॉल भी लगाए हैं।
दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अधिकारी अपने अनुभव और सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे नवाचार साझा करेंगे। कार्यक्रम में बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर आकाश छिकारा, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिव एवं पंजीयक तथा सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सम्मेलन में होने वाला विचार-मंथन सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने तथा ‘सहकार से समृद्धि’ के राष्ट्रीय संकल्प को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा।