सीएम साय बोले- नारी सम्मान और सशक्तीकरण सरकार की प्राथमिकता, 68 लाख महिलाओं को मिल रहा महतारी वंदन योजना का लाभ
रायपुर, मुख्यमंत्री निवास में आयोजित गरबा महोत्सव में नवरात्रि की भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, बेटियों और गुजराती समाज के लोगों ने हिस्सा लिया। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ मां दुर्गा की आराधना की।
मुख्यमंत्री साय ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नवरात्रि शक्ति की आराधना के साथ नारी सम्मान का महापर्व भी है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 68 लाख महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इससे महिलाओं को अपनी जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने में मदद मिल रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह महिलाओं की मेहनत, क्षमता और आत्मविश्वास का प्रमाण है। सरकार का लक्ष्य है कि महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं।
गरबा भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गरबा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। गुजरात से निकली गरबा की परंपरा आज देश-दुनिया में लोकप्रिय है। ऐसे आयोजन विभिन्न समाजों और संस्कृतियों के बीच आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता को मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के पर्व-त्योहार नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। छत्तीसगढ़ में भी गरबा के प्रति लोगों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है और महिलाओं तथा बेटियों की बड़ी भागीदारी इस उत्सव को खास बनाती है।
देवी शक्तिपीठों के संरक्षण पर जोर
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि माता कौशल्या की धरती पर शक्ति आराधना की समृद्ध परंपरा रही है। मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी जैसे प्रमुख देवी धाम प्रदेश की आस्था और सांस्कृतिक पहचान के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश विकास के साथ अपनी विरासत को भी संरक्षित कर रहा है। इसी भावना के अनुरूप राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के धार्मिक स्थलों, शक्तिपीठों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रतिबद्ध है। प्रमुख देवी धामों में श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के विकास में गुजराती समाज का योगदान
मुख्यमंत्री साय ने गुजराती समाज की उद्यमशीलता, परिश्रम और सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि समाज व्यापार, उद्योग, शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की विशेषता विभिन्न समाजों और संस्कृतियों को अपनाने की परंपरा है। विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में गुजराती समाज की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि का पर्व शक्ति, सकारात्मकता और सामूहिकता का संदेश देता है। मां दुर्गा के आशीर्वाद से प्रदेश निरंतर प्रगति करे और प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि आए, यही कामना है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब सहित विभिन्न आयोगों और मंडलों के पदाधिकारी मौजूद रहे। सर्व गुजराती समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतेश गांधी, एन.आर. गुजराती एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष देवजी पटेल, गुजराती स्कूल के अध्यक्ष जयंती पटेल सहित गुजराती समाज के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।