रायपुर : तेलीबांधा मरीन ड्राइव पर सड़क किनारे मिट्टी के दीये बेच रही मीरा उस वक्त हैरान रह गई, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का काफिला अचानक उसके पसरे के पास रुका। मुख्यमंत्री ने बिना किसी औपचारिकता के मीरा से बातचीत की और ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के लिए उसी के पसरे से मिट्टी का एक दीया खरीदा। इसके बदले उन्होंने मीरा को 1,000 रुपये दिए।

मुख्यमंत्री ने मीरा से उसके काम और परिवार के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी पूछा कि क्या उसे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। मीरा ने बताया कि उसका प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत बैंक खाता खुला है और उसे महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1,000 रुपये की राशि भी मिल रही है। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताई और कहा कि योजनाओं का असली मकसद तभी पूरा होता है, जब उनका लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।

मीरा से हुई इस सहज मुलाकात में मुख्यमंत्री ने स्थानीय छोटे कारोबारियों और कारीगरों के काम को बढ़ावा देने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे सामान बेचने वाले छोटे विक्रेता हों, कुम्हार हों या स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाले शिल्पकार—इनके पीछे मेहनत और पूरे परिवार की आजीविका जुड़ी होती है। स्थानीय लोगों से सामान खरीदना उनके हुनर और स्वावलंबन को प्रोत्साहित करने का एक छोटा लेकिन अहम तरीका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ सिर्फ मिट्टी का दीया नहीं, बल्कि सेवा और जनभागीदारी की भावना का प्रतीक है। जिस तरह एक छोटा दीया आसपास का अंधेरा दूर करता है, उसी तरह समाज में हर व्यक्ति का छोटा-सा सेवा प्रयास मिलकर बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से सेवा संकल्प अभियान से जुड़कर अपनी क्षमता के अनुसार जनसेवा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंदों की मदद का संकल्प लेने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। अभियान के जरिए सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकास को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सेवा का कोई काम छोटा नहीं होता—किसी जरूरतमंद की मदद करना, पौधा लगाना, आसपास सफाई रखना या स्थानीय कारीगर से सामान खरीदना भी समाज के लिए योगदान है।

तेलीबांधा के छोटे से पसरे पर हुई यह मुलाकात अपने पीछे एक बड़ा संदेश छोड़ गई। एक तरफ मीरा जैसे छोटे विक्रेता के श्रम और आत्मनिर्भरता का सम्मान हुआ, तो दूसरी तरफ सरकारी योजनाओं की जमीनी पहुंच की तस्वीर भी सामने आई। अब मीरा से खरीदा गया वही मिट्टी का दीया ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के जरिए सेवा, जनभागीदारी और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बनेगा। इस दौरान विधायक पुरंदर मिश्रा भी मौजूद रहे।

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