रायपुर : बाल विवाह के खिलाफ छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे जागरूकता और रोकथाम अभियान को अब वैश्विक स्तर पर भी मजबूती मिली है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किया है। इससे बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ राज्य में चल रहे प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की दर में कमी
राज्य में बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, पंचायतों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इन प्रयासों के बीच राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों में भी सुधार सामने आया है।
NFHS-5 (2019-21) के अनुसार छत्तीसगढ़ में 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करने वाली लड़कियों का प्रतिशत 12.1% था। NFHS-6 (2023-24) में यह घटकर 10.1% रह गया है।
तीन साल में 8,414 बाल विवाह रुकवाए गए
बाल विवाह रोकथाम के लिए काम कर रहे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) और उसके सहयोगी संगठनों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 8,414 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। इसके लिए आठ सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर जागरूकता, निगरानी और बाल संरक्षण से जुड़े अभियान चलाए गए।
बाल विवाह की सूचना समय पर मिले और कार्रवाई हो सके, इसके लिए पंचायतों, स्कूलों, समुदायों, महिलाओं, जनप्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं और पुलिस को भी अभियान से जोड़ा जा रहा है।
भारत से शुरू अभियान को मिली वैश्विक पहचान
संयुक्त राष्ट्र महासभा में सिएरा लियोन की ओर से भारत समेत 67 देशों के समर्थन से प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे 4 सितंबर को पारित किया गया। इसके बाद 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया।
खास बात यह है कि 27 नवंबर 2024 को भारत में ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत हुई थी। अभियान के दौरान 25 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा बाल विवाह के खिलाफ शपथ लेने की बात सामने आई थी। अब संयुक्त राष्ट्र की घोषणा से इस मुद्दे पर वैश्विक स्तर पर जागरूकता और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा और सुरक्षा पर फोकस
छत्तीसगढ़ सरकार का जोर बालिकाओं को शिक्षा, सुरक्षा और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने के साथ बाल विवाह की रोकथाम पर है। राज्य में चल रहे जागरूकता और बाल संरक्षण से जुड़े प्रयासों को 2030 तक बाल विवाह खत्म करने के वैश्विक लक्ष्य से भी जोड़ा जा रहा है।