रायपुर : शिक्षक दिवस पर छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण रहा। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव को वर्ष 2026 के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से नवाजा गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इस वर्ष छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान पाने वाली सुनीता यादव एकमात्र शिक्षिका हैं।

देशभर से चयनित शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान, नवाचार और विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए यह सम्मान दिया गया। समारोह में शिक्षकों के उल्लेखनीय कार्यों पर आधारित लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किए गए।

खेल-खेल में पढ़ाई और तकनीक को बनाया हथियार

ग्रामीण और सीमित संसाधनों वाले स्कूल में सुनीता यादव ने पढ़ाई को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने साहित्य, तकनीक, रचनात्मक गतिविधियों और अनुभव आधारित तरीकों को कक्षा का हिस्सा बनाया।

कमजोर विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए उन्होंने खेल-खेल में शिक्षा की पद्धति अपनाई। कठिन विषयों को आसान बनाने के लिए बच्चों और खुद के अभिनय वाली लघु फिल्में तैयार कर उनका इस्तेमाल भी शिक्षण में किया।

दीक्षा एप से स्मार्ट क्लास तक, पढ़ाई में तकनीक का इस्तेमाल

सुनीता यादव पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए दीक्षा एप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और स्मार्ट क्लास जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करती हैं। शिक्षा के साथ बच्चों को रोजगार से जुड़ी जानकारी और डिजिटल साक्षरता देने पर भी उनका जोर रहा है।

उनके प्रयासों ने छोटे से ग्रामीण विद्यालय में तकनीक और रचनात्मकता आधारित शिक्षण का अलग उदाहरण पेश किया है।

आदिवासी बच्चों के लिए लगाया निशुल्क समर कैंप

सुनीता यादव का काम केवल स्कूल की कक्षा तक सीमित नहीं रहा। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वे अपने खर्च से विद्यार्थियों को नियमित दूध उपलब्ध कराती हैं और समुदाय को न्योता भोजन के लिए प्रेरित करती हैं।

शिक्षा से दूर और कमजोर वर्ग के बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप भी चलाया।

पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ा शिक्षण

उन्होंने बच्चों में सामाजिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने के लिए भी कई गतिविधियां कराईं। प्रकृति संरक्षण के लिए सीड बॉल तैयार करना और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों के लिए राखी बनाना जैसी गतिविधियों को पढ़ाई से जोड़ा गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में हुए बदलाव और उनके प्रभाव पर शोध पत्र तैयार करने वाली वे जिले की पहली महिला शिक्षिका भी हैं।

राज्य शिक्षक सम्मान समेत कई उपलब्धियां

सुनीता यादव को शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में पहले भी सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2024 में राज्य शिक्षक सम्मान और वर्ष 2025 में पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण से उन्हें सम्मानित किया गया था। राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान उनके लगातार किए जा रहे नवाचार और प्राथमिक शिक्षा में योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हुई मुलाकात

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चयनित शिक्षकों को अपने आवास पर आमंत्रित किया था। इस दौरान सुनीता यादव ने प्रधानमंत्री के साथ अपने शिक्षण कार्य, नवाचार और ग्रामीण बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की।

प्रधानमंत्री ने ग्रामीण स्कूल में लघु फिल्मों, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट और स्मार्ट क्लास जैसे माध्यमों के इस्तेमाल की सराहना की।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव का क्षण

सुनीता यादव को राष्ट्रीय सम्मान मिलने पर जिले के प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा, कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र में रहकर बच्चों की शिक्षा को नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़ने वाली उनकी पहल पूरे जिले के लिए प्रेरणादायक है।

शिक्षक परिवार से निकलीं, शिक्षा को बनाया कर्मक्षेत्र

महासमुंद जिले के सांकरा में शिक्षक परिवार में जन्मीं सुनीता यादव ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सांकरा में पूरी की। उन्होंने पिथौरा से स्नातक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर और पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर से बीएड की पढ़ाई की।

शिक्षण को करियर बनाने के बाद उन्होंने ग्रामीण बच्चों की जरूरतों के अनुरूप पढ़ाने के नए तरीके विकसित किए। राष्ट्रपति के हाथों मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान उनकी इसी लंबी यात्रा और प्राथमिक शिक्षा में किए गए नवाचारों की राष्ट्रीय पहचान बन गया है।

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