धमतरी : विकसित भारत-जी राम जी के आयुक्त एवं प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा ने धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों का दौरा कर सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जमीनी स्थिति देखी। उन्होंने ग्राम पंचायत धूमा में बालिका शौचालय, अमृत सरोवर और पंचायत भवन का निरीक्षण किया। इसके बाद चरमुड़िया के आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
श्रमिकों से मजदूरी भुगतान की जानकारी ली
धूमा पंचायत में बालिका शौचालय निर्माण का निरीक्षण करते हुए सिन्हा ने मौके पर काम कर रहे श्रमिकों से बातचीत की और मजदूरी भुगतान की स्थिति जानी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को श्रमिकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अमृत सरोवर का भी निरीक्षण किया। यहां स्व-सहायता समूह द्वारा किए जा रहे मछली पालन की जानकारी लेते हुए समूह की आयवर्धक गतिविधियों और आजीविका के साधनों पर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों से जुड़े ऐसे कार्यों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
QR कोड स्कैन कर देखी विकास कार्यों की जानकारी
पंचायत भवन में सिन्हा ने QR कोड स्कैन कर ग्राम पंचायत में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों की जानकारी देखी। उन्होंने क्लार्ट ऐप और युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से प्रस्तावित एवं स्वीकृत कार्यों की स्थिति की समीक्षा की।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत बन रहे आवासों की प्रगति की जानकारी पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक से ली। उन्होंने पंचायत स्तर पर योजनाओं की नियमित निगरानी, समयबद्ध प्रगति और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
आंगनबाड़ी केंद्र में व्यवस्थाओं का जायजा
चरमुड़िया के आंगनबाड़ी केंद्र में उन्होंने उपलब्ध सुविधाओं और संचालन की स्थिति देखी। बच्चों के लिए जरूरी सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन और केंद्र की व्यवस्थाओं को मजबूत रखने पर अधिकारियों को ध्यान देने के निर्देश दिए।
स्थानीय जरूरतों के आधार पर बने कार्ययोजना
दौरे के बाद जनपद पंचायत कुरूद कार्यालय में कार्यक्रम अधिकारियों और तकनीकी सहायकों की बैठक हुई। इसमें ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना तैयार करने और कार्यों को सिक्योर एवं युक्तधारा पोर्टल पर शामिल करने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई।
सिन्हा ने कहा कि ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसमें स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और ग्रामीणों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे कार्य शामिल किए जाएं, जिनसे टिकाऊ और उपयोगी परिसंपत्तियां तैयार हो सकें।
उन्होंने अधिकारियों को कार्यों की समयबद्ध स्वीकृति, गुणवत्ता के साथ निर्माण और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों और तकनीकी सहायकों के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया।