जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में बनाया रिकॉर्ड, 5,429 जल संरचनाओं से 5,608 हेक्टेयर से अधिक सिंचाई क्षेत्र बढ़ा
सूरजपुर। जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के क्षेत्र में सूरजपुर जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में सूरजपुर को देश में चौथा और छत्तीसगढ़ में पहला स्थान मिला है।
नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर मॉडल की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल संरक्षण को सरकारी योजनाओं तक सीमित न रखते हुए किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखी और जल मित्रों की भागीदारी से जनांदोलन का रूप दिया गया है।
5,429 जल संरचनाओं से बढ़ी सिंचाई क्षमता
अभियान के तहत सूरजपुर में 5,429 जल संरचनाएं तैयार की गईं। इनमें अमृत सरोवर, तालाब गहरीकरण, फार्म पॉन्ड, रिचार्ज पिट, कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम शामिल हैं। इन संरचनाओं की कुल जल भराव क्षमता 94.89 लाख घन मीटर है। इससे जिले में सिंचित रकबे में 5,608.26 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। सभी जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग के साथ नियमित समीक्षा भी की जा रही है।
जनभागीदारी बनी सफलता की बड़ी वजह
कलेक्टर रेना जमील ने कहा कि जल संरक्षण हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों और किसानों ने भूमि उपलब्ध कराने के साथ श्रमदान कर अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि प्रधानमंत्री के ‘कैच द रेन—जहां जल गिरे, वहीं सहेजें’ संदेश को पंचायत स्तर पर लागू करते हुए जल सुरक्षा और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। इससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण आजीविका में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।