रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, दिल्ली की ओर से तैयार की गई पुस्तक ‘जशपुर : एक परिचय’ का विमोचन किया। पुस्तक में जशपुर के इतिहास, प्रशासन, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और विकास की संभावनाओं को एक साथ समेटने की कोशिश की गई है।

पुस्तक के विमोचन के मौके पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जशपुर की पहचान केवल उसके पहाड़ों, जंगलों, नदियों और जलप्रपातों से नहीं है, बल्कि यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराएं भी इसे प्रदेश के दूसरे इलाकों से अलग पहचान देती हैं। ऐसे में जिले की विकास यात्रा और प्रशासनिक बदलावों को एक पुस्तक में दर्ज करना महत्वपूर्ण पहल है।

प्रशासन से लेकर विकास तक का दस्तावेज

‘जशपुर : एक परिचय’ में आजादी के बाद जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में हुए बदलावों से लेकर मौजूदा प्रशासनिक ढांचे तक का अध्ययन किया गया है। इसके साथ ही सामाजिक-आर्थिक बदलाव, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और स्थानीय विकास जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र के भविष्य की योजना बनाने के लिए उसके इतिहास, समाज, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय जरूरतों को समझना जरूरी है। जशपुर जैसे जनजातीय और प्राकृतिक रूप से विशिष्ट जिले के लिए इस तरह का अध्ययन प्रशासन और नीति निर्माण में उपयोगी हो सकता है।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की संभावनाओं पर भी जोर

जशपुर की प्राकृतिक खूबसूरती को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पर्यटन को जिले की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी रेखांकित कीं। पहाड़, घने जंगल, नदियां, झरने और घाटियां यहां प्राकृतिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं पैदा करते हैं।

इसके साथ ही जनजातीय जीवन, लोक कला, पारंपरिक संस्कृति और स्थानीय खान-पान को भी पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं हैं। कृषि, वनोपज, स्थानीय उत्पादों और महिला एवं युवा उद्यमिता को बढ़ावा देकर रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

जशपुर को ही क्यों चुना गया?

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की क्षेत्रीय शाखाओं को संबंधित राज्यों के कम से कम एक जिले का व्यापक अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर ने प्रदेश के 33 जिलों में से जशपुर को अध्ययन के लिए चुना।

जशपुर का चयन इसकी भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को देखते हुए किया गया। छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित यह जिला छोटानागपुर पठार के विस्तारित क्षेत्र का हिस्सा है। यहां जनजातीय आबादी, वन आधारित आजीविका और पारंपरिक जीवनशैली की अपनी अलग पहचान है।

गजेटियर से अलग है पुस्तक का स्वरूप

पुस्तक को पारंपरिक जिला गजेटियर के रूप में नहीं, बल्कि जशपुर के अलग-अलग पहलुओं को एक साथ देखने वाले समग्र दस्तावेज के रूप में तैयार किया गया है। वर्ष 1998 में अलग जिला बनने से पहले जशपुर रायगढ़ जिले की तहसील था। जशपुर का अलग जिला गजेटियर उपलब्ध नहीं होने के कारण अध्ययन के दौरान रायगढ़ जिला गजेटियर के साथ सरकारी रिपोर्ट, जनगणना 2011 और विभिन्न विभागों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया गया।

इसकी एक खास बात यह है कि अध्ययन किसी एक व्यक्ति के प्रयास तक सीमित नहीं रहा। जिला प्रशासन के अलग-अलग विभागों से मिली जानकारी और आंकड़ों को एकत्र कर जशपुर की प्रशासनिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक तस्वीर तैयार की गई है।

आगे के शोध के लिए भी आधार बनेगी पुस्तक

मुख्यमंत्री साय ने उम्मीद जताई कि ‘जशपुर : एक परिचय’ जिले को समझने के इच्छुक प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री बनेगी। साथ ही यह पुस्तक जशपुर के इतिहास, संस्कृति, प्रशासन और विकास की संभावनाओं पर भविष्य में होने वाले विस्तृत शोध के लिए आधार भी तैयार कर सकती है।

विमोचन कार्यक्रम में भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन एवं पूर्व मुख्य सचिव सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन एवं पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन, पूर्व मुख्य सचिव और छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह मौजूद रहे।

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