रायपुर : छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और विकास को समर्पित राजभाषा आयोग के कार्यालय स्थापना दिवस पर राजधानी रायपुर में गरिमामय साहित्यिक आयोजन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेशभर से साहित्यकार, कवि, रचनाकार, भाषा-सेवी और साहित्यप्रेमी शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ साहित्यकारों एवं भाषा-सेवियों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण राजभाषा आयोग द्वारा प्रकाशित 26 पुस्तकों का विमोचन रहा। इन पुस्तकों के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा, लोकसंस्कृति और साहित्यिक परंपराओं को दस्तावेज के रूप में संरक्षित करने की पहल की गई है। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य का प्रकाशन आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
समारोह में छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्य सृजन और जनमानस तक भाषा की पहुंच बढ़ाने वाले भाषा-सेवियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में आकाशवाणी के सेवानिवृत्त उद्घोषक संजय पाण्डेय, वरिष्ठ दूरदर्शन उद्घोषक एवं पत्रकार ज्योति सिंह, आकाशवाणी के सेवानिवृत्त कार्यक्रम अधिकारी समीर शुक्ला, साहित्यकार चेतन भारती और रायपुर के साहित्यकार चोवाराम वर्मा ‘बादल’ शामिल रहे।
मुख्य वक्ता प्रो. राजन यादव ने भाषा, साहित्य और संस्कृति के परस्पर संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी समाज की पहचान, इतिहास, संस्कृति और सामूहिक स्मृतियों को संजोने वाली शक्ति है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से आए वरिष्ठ साहित्यकारों और रचनाकारों ने अपनी सहभागिता से आयोजन की गरिमा बढ़ाई। वरिष्ठ साहित्यकार परदेशी राम वर्मा, अरुण निगम, मीर अली मीर, वरिष्ठ कवयित्री शशिकला दुबे, वीर अजीत शर्मा, शकुंतला तरार और सीमा निगम सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे। इस दौरान भाषा के संरक्षण, संवर्धन और साहित्यिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
आयोजन में विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरन्दर मिश्रा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दयाल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, संस्कृति एवं राजभाषा संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा और सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। सम्मान, साहित्य और प्रकाशन के इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण और समृद्धि के संकल्प को नई मजबूती दी।