रायपुर : हरेली तिहार की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ सरकार ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसानों और स्व-सहायता समूहों को बड़ी सौगात दी। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने राज्य वन अनुसंधान भवन में आयोजित कार्यक्रम में नारायणपुर (अबूझमाड़) और धमतरी के किसानों एवं 43 स्व-सहायता समूहों को कुल 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए कम लागत और अधिक लाभ वाला विकल्प है। अश्वगंधा, शतावर, एलोवेरा, तुलसी और लेमनग्रास जैसी फसलों में पानी और रासायनिक खाद की जरूरत कम होती है, जबकि बाजार में इनकी मांग अधिक होने से किसानों को बेहतर आमदनी का अवसर मिलता है। खेत की मेड़ों पर भी औषधीय पौधे लगाकर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।
हरेली पर किसानों को मिला आर्थिक संबल
मंत्री ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति से जुड़ा प्रमुख पर्व है। इस अवसर पर औषधीय पौधों की खेती के लिए अग्रिम राशि देना किसानों के लिए विशेष उपहार है। इससे उन्हें खेती शुरू करने के लिए शुरुआती आर्थिक सहायता मिलेगी और औषधीय फसलों की ओर बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा।
50 दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण पर काम
छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने बताया कि प्रदेश में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी करीब 50 दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य शुरू किया गया है। साथ ही पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, वैद्यों के क्षमता विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
किसानों को मुफ्त पौधे और उपज की खरीदी की सुविधा
बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार औषधीय पौधों की खेती को मिशन मोड में बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराने के साथ उनकी उपज की खरीदी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। कार्यक्रम में 25 किसान, 18 किसान और 43 स्व-सहायता समूहों को कुल 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि दी गई। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा को भी मजबूती देगी।