रायपुर : आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर की ओर से अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत ग्राम बेल्टुकरी के अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों और किसान महिलाओं को 100 स्टोरेज बिन वितरित किए गए। इस पहल का उद्देश्य किसानों को कृषि उपज के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराना और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना है।

कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ उपज का उचित भंडारण भी बेहद जरूरी है। वैज्ञानिक भंडारण पद्धतियों को अपनाने से कृषि उपज को नमी, कीट प्रकोप और अन्य कारणों से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। इससे उपज की गुणवत्ता और मात्रा लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से कृषि उपज का भंडारण करने से फसल उपरांत नुकसान कम होने के साथ किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ भी मिल सकता है। संस्थान द्वारा किसानों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार वैज्ञानिक तकनीकों और उपयोगी कृषि ज्ञान को गांवों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

किसानों को धान की फसल प्रबंधन की दी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान डॉ. पंकज शर्मा, संयुक्त निदेशक एवं एससीएसपी समन्वयक ने किसानों से संवाद किया। उन्होंने धान की फसल में रोपाई के बाद अपनाई जाने वाली प्रमुख सस्य क्रियाओं की जानकारी देते हुए समय पर खरपतवार प्रबंधन, संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग, उचित जल प्रबंधन और फसल की नियमित निगरानी पर जोर दिया।

डॉ. शर्मा ने किसानों को आगामी समय में धान की फसल में संभावित प्रमुख कीटों की पहचान और उनके प्रभावी प्रबंधन की जानकारी भी दी। उन्होंने किसानों से फसल की नियमित निगरानी करने और कीट प्रकोप की शुरुआती अवस्था में वैज्ञानिक सलाह के आधार पर उचित प्रबंधन उपाय अपनाने की अपील की।

वैज्ञानिक तकनीकों से किसानों को सशक्त बनाने पर जोर

डॉ. शर्मा ने बताया कि अनुसूचित जाति उपयोजना के माध्यम से किसानों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए वैज्ञानिक जानकारी, कृषि उपकरण एवं यंत्र, प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ी उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य किसानों की तकनीकी क्षमता बढ़ाना, कृषि कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और कृषि आय में वृद्धि के लिए जरूरी सहयोग प्रदान करना है।

स्टोरेज बिन प्राप्त करने वाले किसानों और किसान महिलाओं ने संस्थान के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन भंडारण सुविधाओं से कृषि उपज को सुरक्षित रखने और भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।

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