Achleshwar Temple: स्थानीय लोग बताते हैं कि एक बार अर्बुद पर्वत पर स्थित नंदीवर्धन हिलने लगा था. उस समय इस पर्वत पर नंदीजी भी थे. पर्वत हिलने की वजह से हिमालय पर तपस्या कर रहे भगवान शिव की तपस्या में विघ्न पहुंचने लगा और उनकी तपस्या भंग हो गई. शिवजी ने नंदी को बचाने के लिए हिमालय से ही अपने अंगूठे को अर्बुद पर्वत तक पहुंचा दिया और पर्वत को हिलने से रोक कर स्थिर कर दिया.