रायपुर, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास आज पूरी दुनिया के सामने महत्वपूर्ण विषय हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध और जागरूकता को बढ़ावा देना जरूरी है। इसी दिशा में शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजिम के प्राध्यापकों द्वारा संपादित पुस्तक ‘एनवायर्नमेंटल मैनेजमेंट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ का विमोचन किया गया। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने पुस्तक का विमोचन करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और अकादमिक उत्कृष्टता का महत्वपूर्ण संगम बताया।
शोध और पर्यावरण जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा
मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल बौद्धिक रूप से सक्षम बनाना नहीं, बल्कि उन्हें प्रकृति के प्रति जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाना भी है। पर्यावरण संरक्षण जैसे वैश्विक विषयों पर शोध और मौलिक लेखन को प्रोत्साहित करना समय की जरूरत है।
उन्होंने पुस्तक के संपादन और प्रकाशन से जुड़े प्राध्यापकों को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रयास छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए गौरव की बात है। पुस्तक विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मार्गदर्शन देने के साथ सतत विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी उपयोगी साबित होगी।
तीन प्राध्यापकों ने किया पुस्तक का संपादन
इस शोधपरक पुस्तक का संपादन शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजिम की प्राचार्य डॉ. समीक्षा चंद्राकर, रसायन शास्त्र के सहायक प्राध्यापक डॉ. देवेन्द्र कुमार और वनस्पति शास्त्र के सहायक प्राध्यापक डॉ. सर्वेश कौशिक पटेल के संयुक्त मार्गदर्शन एवं प्रयासों से किया गया है।
मंत्री वर्मा ने संपादक मंडल के कार्यों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध, नवाचार और मौलिक लेखन को बढ़ावा मिलने से अकादमिक गतिविधियां मजबूत होती हैं और समाज को भी इसका लाभ मिलता है।
पर्यावरण प्रबंधन और सतत विकास पर केंद्रित है पुस्तक
वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियां लगातार गंभीर हो रही हैं। ऐसे में पर्यावरण प्रबंधन और सतत विकास से जुड़े विषयों पर अध्ययन और शोध का महत्व बढ़ गया है।
पुस्तक में इन विषयों के वैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं को रेखांकित किया गया है। इसमें शामिल शोध-पत्र और नीतिगत विषय उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विषय विशेषज्ञों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
यह पहल उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के प्रति समझ विकसित करने में योगदान दे सकती है।